जयपुर | भारत के कर ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। दशकों पुराने आयकर अधिनियम 1961 को अब नया स्वरूप दिया गया है। नया 'आयकर अधिनियम 2025' पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था पर केंद्रित है। इसमें करदाताओं की सुविधा के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य कर प्रणाली को सरल बनाना है।
वर्चुअल डिजिटल स्पेस की नई परिभाषा
सरकार ने पहली बार 'वर्चुअल डिजिटल स्पेस' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। इसका सीधा असर आपकी डिजिटल गोपनीयता और जांच प्रक्रिया पर पड़ेगा। अब आयकर विभाग के अधिकारियों को जांच के दौरान विशेष अधिकार मिलेंगे। वे करदाता के ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट और क्लाउड डेटा की जांच कर सकेंगे। यह कदम डिजिटल अर्थव्यवस्था में होने वाले संदिग्ध लेन-देन को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे कर चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कानून डिजिटल संपत्तियों के लेन-देन को ट्रैक करने में सहायक होगा।
टैक्स स्लैब में बदलाव: राजस्थान को बड़ी राहत
राजस्थान सहित पूरे देश के मध्यम वर्ग के लिए टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया है। नई व्यवस्था में 4 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त होगी। 4 लाख से 8 लाख रुपये की आय पर 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। वहीं 8 से 12 लाख रुपये पर 10 प्रतिशत की दर तय की गई है। 12 से 16 लाख रुपये की आय पर 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा। 24 लाख से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत की दर लागू रहेगी। यह ढांचा 'कम छूट और कम दर' के सिद्धांत पर आधारित है। इससे आम आदमी की बचत में वृद्धि होने की उम्मीद है।
फॉर्म 16 की विदाई और नए फॉर्म का आगमन
सैलरी क्लास के लिए सबसे चौंकाने वाला बदलाव फॉर्म 16 को लेकर है। अब दशकों पुराने इस फॉर्म को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। अब कर्मचारियों को अपनी कंपनी से फॉर्म 16 के बजाय 'फॉर्म 130' मिलेगा। यह नया फॉर्म अधिक विस्तृत और डिजिटल फ्रेंडली होगा। इसी प्रकार, टैक्स डॉक्यूमेंट 26-एएस (26-AS) का नाम भी बदल दिया गया है। अब इसे 'फॉर्म 168' के नाम से जाना जाएगा। ये बदलाव कर फाइलिंग की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किए गए हैं। इससे कागजी कार्रवाई में काफी कमी आएगी।
स्टैंडर्ड डिडक्शन और वरिष्ठ नागरिकों को लाभ
नौकरीपेशा और पेंशनभोगियों के लिए मानक कटौती (Standard Deduction) बढ़ा दी गई है। इसे 50,000 से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। इससे करदाताओं को 25,000 रुपये की अतिरिक्त बचत का सीधा लाभ मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए टीडीएस छूट की सीमा भी बढ़ाई गई है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए अब 1 लाख रुपये तक के ब्याज पर टीडीएस नहीं कटेगा। पहले यह सीमा केवल 50,000 रुपये तक सीमित थी। यह बदलाव बुजुर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।
1961 बनाम 2025: क्या बदला?
पुराना कानून काफी जटिल था और इसमें सैकड़ों संशोधन हो चुके थे। नए कानून का मुख्य उद्देश्य सरलता और पूर्ण डिजिटलीकरण है। पुराने कानून में असेसमेंट ईयर की जटिलता थी, जिसे अब 'टैक्स ईयर' कहा जाएगा। रिटर्न में सुधार के लिए अब 4 साल का समय मिलेगा। विवादों के निपटारे के लिए अब लंबी अदालती प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं होगी। फेसलेस और ऑनलाइन समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे करदाताओं और विभाग के बीच सीधा टकराव कम होगा।
राजस्थान की औद्योगिक और न्यायिक हलचल
प्रदेश में केवल टैक्स ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में भी हलचल तेज है। रिफाइनरियों से ईंधन आपूर्ति ठप होने से 400 इकाइयों पर संकट मंडरा रहा है। न्यायिक क्षेत्र में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अनोखा फैसला सुनाया है। एटीएम काटकर चोरी करने वाले आरोपियों को जमानत के बदले 30 दिन तक पौधे लगाने का आदेश दिया गया है। वहीं राजनीतिक गलियारे में बाड़मेर के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष फतेह खान को गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक से राहत मिली है। जोधपुर में संभल एसपी केके बिश्नोई और आईपीएस अंशिका वर्मा की शाही शादी भी चर्चा में है।
मौसम और अन्य बदलाव
राजस्थान में मौसम का मिजाज भी बदल रहा है, जहां मार्च में 10 साल का रिकॉर्ड टूटा है। ओलावृष्टि और बारिश ने खेतों में सफेद चादर बिछा दी है। प्रशासन ने आने वाले दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही 1 अप्रैल से शराब पर आबकारी ड्यूटी बढ़ाकर 80 प्रतिशत कर दी गई है। रोडवेज बेड़े में 20 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने से प्रदूषण में कमी आएगी। यह सभी बदलाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली को प्रभावित करेंगे।
विशेषज्ञ की राय
चार्टर्ड एकाउंटेंट संजीव भूतड़ा के अनुसार, नया कानून 'स्वैच्छिक अनुपालन' को बढ़ावा देता है। धाराओं की संख्या कम होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। करदाताओं को अब अपनी पुरानी आदतों को बदलकर डिजिटल माध्यमों को अपनाना होगा। सरल भाषा के कारण अब लोग स्वयं अपनी टैक्स देनदारी समझ सकेंगे। यह कानून भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने में सहायक होगा। सरकार का यह कदम दूरदर्शी और आधुनिक भारत की जरूरतों के अनुरूप है।