सिरोही | एनएच-168 पर प्रस्तावित सिरोही बाईपास के एलाइनमेंट (संरेखण) को लेकर विवाद अब राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त, 2026 को निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह जनहित याचिका राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं प्रवीर भटनागर की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से अधिवक्ता राजेश शाह ने यह याचिका दायर की है।
याचिका में मुख्य रूप से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एनएच-168 के सिरोही बाईपास के लिए स्वीकृत किए गए एलाइनमेंट (विकल्प-4) को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह मंजूरी जनहित के अनुरूप नहीं है।
विकल्प-4 के खिलाफ याचिका में दलीलें
याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में स्वीकृत विकल्प-4 घनी आबादी, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
इससे भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ जाएगी और शहर के नियोजित शहरी विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। याचिका में शहर के आर्थिक एवं सामाजिक ढांचे पर भी नकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
क्यों बेहतर है विकल्प-5?
याचिकाकर्ता के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत सिरोही मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित विकल्प-5 तकनीकी रूप से अधिक उपयुक्त, सुरक्षित और कम लागत वाला है।
यह विकल्प शहर के नियोजित विकास के अनुरूप होने के साथ-साथ आमजन के लिए भी अधिक सुविधाजनक है। याचिका में दावा किया गया है कि विकल्प-5 से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या भी कम है, जिससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी।
लागत में बड़ा अंतर
याचिका में दोनों विकल्पों की लागत का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है।
विकल्प-4 में केवल बाईपास निर्माण पर लगभग ₹158 करोड़ खर्च होने का अनुमान है, जबकि पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹303 करोड़ है।
इसके विपरीत, विकल्प-5 में बाईपास निर्माण की लागत करीब ₹83 करोड़ है और पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹249 करोड़ बताई गई है।
मास्टर प्लान की भूमिका और कानूनी आधार
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के आर.के. मित्तल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले के निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया है कि मास्टर प्लान केवल एक प्रशासनिक मार्गदर्शिका नहीं, बल्कि एक बाध्यकारी आधिकारिक दस्तावेज है। इसका पालन किया जाना आवश्यक है।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि विभागीय अधिकारियों और केंद्रीय मंत्री को भी वास्तविक तथ्यों से अवगत कराया गया था और अधिकारियों की तुलनात्मक रिपोर्ट में भी विकल्प-5 को ही बेहतर बताया गया था।
अगली सुनवाई 6 अगस्त को
इस जनहित याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी, राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (पीडब्ल्यूडी), जिला कलक्टर सिरोही, और नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सहित कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
अब सभी की निगाहें 6 अगस्त, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब केंद्र और राज्य सरकार इस मामले में अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखेंगी।
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