राजस्थान

एनएच-168 सिरोही बाईपास मामला: हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य सरकार से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 6 अगस्त को

गणपत सिंह मांडोली · 27 जुलाई 2026, 05:15 शाम
सिरोही बाईपास के स्वीकृत एलाइनमेंट को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।

सिरोही/जोधपुर | राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से अधिवक्ता राजेश शाह द्वारा प्रस्तुत की गई है।

याचिका में कहा गया है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एनएच-168 के सिरोही बाईपास के लिए जिस एलाइनमेंट (विकल्प-4) को मंजूरी दी गई है, वह जनहित के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत सिरोही मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित विकल्प-5 तकनीकी रूप से अधिक उपयुक्त, सुरक्षित तथा कम लागत वाला है। इसके अलावा यह शहर के नियोजित विकास के अनुरूप होने के साथ-साथ आमजन के लिए अधिक सुविधाजनक भी है।

याचिका में बताया गया है कि वर्तमान में स्वीकृत विकल्प-4 घनी आबादी, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ेगी तथा शहर के नियोजित शहरी विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही शहर के आर्थिक एवं सामाजिक ढांचे पर भी नकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई गई है।

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि विकल्प-5 न केवल कम लागत वाला है बल्कि इससे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या भी कम है। इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और आमजन को अधिक सुविधाजनक बाईपास उपलब्ध हो सकेगा। याचिका के अनुसार इस संबंध में विभागीय अधिकारियों एवं केंद्रीय मंत्री को भी वास्तविक तथ्यों से अवगत कराया गया था। अधिकारियों द्वारा तैयार तुलनात्मक रिपोर्ट में भी विकल्प-5 को बेहतर बताया गया, लेकिन इसके बावजूद मंत्रालय ने विकल्प-4 पर कार्य प्रारंभ कर दिया, जो सुशासन के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

याचिका में लागत का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार विकल्प-4 में केवल बाईपास निर्माण पर लगभग ₹158 करोड़ खर्च होने का अनुमान है, जबकि विकल्प-5 में यह लागत करीब ₹83 करोड़ है। वहीं पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत विकल्प-4 में ₹303 करोड़ तथा विकल्प-5 में ₹249 करोड़ बताई गई है।

जनहित याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी, राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (पीडब्ल्यूडी), जिला कलक्टर सिरोही, प्रोजेक्ट डायरेक्टर नेशनल हाईवे, अधिशासी अभियंता (नेशनल हाईवे डिवीजन) पीडब्ल्यूडी पाली, उपखंड अधिकारी सिरोही तथा उपखंड अधिकारी रेवदर को पक्षकार बनाया गया है।

संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर इस जनहित याचिका में एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी के निर्णय को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के आर.के. मित्तल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले के निर्णय का भी हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि मास्टर प्लान केवल प्रशासनिक मार्गदर्शिका नहीं, बल्कि एक बाध्यकारी आधिकारिक दस्तावेज है, जिसका पालन किया जाना आवश्यक है।

अब इस महत्वपूर्ण मामले में सभी की निगाहें 6 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब केंद्र एवं राज्य सरकार अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगी।

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