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भीषण लू पर NHRC का बड़ा कदम: NHRC का 21 राज्यों को नोटिस: लू से बचाएं आमजन की जान

मानवेन्द्र जैतावत · 28 अप्रैल 2026, 03:08 दोपहर
NHRC ने भीषण गर्मी और लू से होने वाली मौतों को रोकने के लिए 21 राज्यों और दिल्ली को निर्देश दिए हैं।

नई दिल्ली | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश के 21 राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को भीषण गर्मी के दौरान लोगों के जीवन की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है। आयोग ने लू के बढ़ते खतरों को देखते हुए राहत उपायों को लागू करने को कहा है।

संवेदनशील समूहों की सुरक्षा प्राथमिकता

NHRC ने चिंता जताई है कि अपर्याप्त आश्रय और संसाधनों की कमी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और बेघर लोग लू की चपेट में आ रहे हैं।

बुजुर्ग, बच्चे, नवजात शिशु और बाहर काम करने वाले श्रमिक गर्मी के स्वास्थ्य प्रभावों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील पाए गए हैं।

आयोग के अनुसार, भीषण गर्मी न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि इससे आजीविका का नुकसान और आग लगने की दुर्घटनाएं भी बढ़ती हैं।

आंध्र प्रदेश, बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप योजना बनाने को कहा गया है।

 

एनसीआरबी के आंकड़े और राज्यों की जिम्मेदारी

आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2019-23 के दौरान भारत में लू से 3,712 मौतें हुईं।

इन मौतों को रोकने के लिए राज्यों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के मौजूदा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है।

भीषण गर्मी के दौरान हाशिए पर रहने वाले लोगों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं होते, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए एकीकृत और समावेशी उपाय आवश्यक हैं।

आयोग ने राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में तत्काल प्रभाव से राहत कार्यों को सुचारू बनाने और कार्यान्वयन को सुगम बनाने पर जोर दिया है।

 

21 राज्यों को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित 21 राज्यों के मुख्य सचिवों को इस संबंध में विस्तृत पत्र लिखा गया है।

आयोग ने इन राज्यों से जिला स्तर पर की गई समेकित कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है ताकि राहत कार्यों की वास्तविकता का पता चल सके।

गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों को भी अपनी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के तहत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

NHRC का यह कदम बढ़ते जलवायु परिवर्तन और भीषण गर्मी के दौर में मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

समय रहते की गई कार्रवाई और संसाधनों का सही प्रबंधन हजारों लोगों की जान बचा सकता है और गर्मी के प्रकोप को कम कर सकता है।

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