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नीति आयोग का DPI@2047 रोडमैप: विकसित भारत 2047: नीति आयोग ने पेश किया डिजिटल रोडमैप

मानवेन्द्र जैतावत · 28 अप्रैल 2026, 03:42 दोपहर
समावेशी विकास के लिए नीति आयोग ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का नया प्रारूप जारी किया।

नई दिल्ली | नीति आयोग ने 27 अप्रैल 2026 को 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 'डीपीआई@2047' प्रारूप का अनावरण किया है।

यह रणनीतिक रोडमैप भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) यात्रा के अगले चरण को रेखांकित करता है, जो समावेशी विकास पर केंद्रित है।

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के नियम बदल रहे हैं और अब लाभ केवल नवाचार से नहीं, बल्कि इसके जुड़ाव से मिलता है।

वर्तमान परिदृश्य में विभिन्न संस्थानों और पारिस्थितिकी तंत्रों को एक साथ जोड़ना और नवाचार को जन-जन तक पहुँचाना सबसे महत्वपूर्ण हो गया है।

नीति आयोग के अनुसार, डिजिटल रेल वह माध्यम है जो सेवाओं को पायलट प्रोजेक्ट से निकालकर राष्ट्रव्यापी प्रभाव तक ले जाती है।

विकसित भारत के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का महत्व

नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने इस महत्वपूर्ण प्रारूप का अनावरण किया।

इस अवसर पर नीति आयोग की सीईओ सुश्री निधि छिब्बर और मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप संस्थापकों और विकास भागीदारों ने बड़े उत्साह के साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

यह प्रारूप एकस्टेप फाउंडेशन और डेलॉयट के सहयोग से तैयार किया गया है, जो देश के डिजिटल भविष्य की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।

प्रारूप में देश के डिजिटल परिवर्तन के लिए दो विशिष्ट चरणों का मार्ग निर्धारित किया गया है, जो समयबद्ध लक्ष्यों पर आधारित हैं।

पहला चरण DPI 2.0 (2025-2035) है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापक स्तर पर आजीविका-आधारित विकास को तीव्र गति प्रदान करना है।

दूसरा चरण DPI 3.0 (2035-2047) है, जो भारत में व्यापक समृद्धि और विकसित राष्ट्र की संकल्पना को साकार करने के लिए है।

DPI 2.0: आजीविका और उत्पादकता पर विशेष ध्यान

तात्कालिक ध्यान DPI 2.0 पर केंद्रित है, जिसके तहत आठ प्रमुख क्षेत्रीय परिवर्तनों की पहचान की गई है जो अर्थव्यवस्था को बदलेंगे।

इन क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी गई है।

प्रारूप का उद्देश्य इन क्षेत्रों में मौजूद संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना और डिजिटल समाधानों के माध्यम से दक्षता बढ़ाना है।

इसके साथ ही, ऋण उपलब्धता, विकेंद्रीकृत ऊर्जा और सरकारी लाभों के वितरण जैसे प्रणालीगत समर्थकों को भी मजबूत किया जाएगा।

उद्देश्य को परिणामों में बदलने के लिए चार अनिवार्य कार्यान्वयन रणनीतियों की रूपरेखा भी इस विस्तृत दस्तावेज में दी गई है।

इसमें जिला-आधारित मांग एकत्रीकरण और प्रौद्योगिकी उद्यमिता को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि जमीनी स्तर पर बदलाव महसूस हो सके।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का लाभ उठाना और डेटा के बेहतर उपयोग के माध्यम से अंतर-क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।

डिजिटल लेनदेन और मजबूत मानव क्षमता का निर्माण इस नई अवसंरचना के मुख्य स्तंभ होंगे जो एआई के लोकतंत्रीकरण में मदद करेंगे।

आर्थिक परिवर्तन के मुख्य चालक के रूप में डिजिटल नेटवर्क

मूल रूप से, DPI 2.0 का लक्ष्य देश के डिजिटल नेटवर्क को पहचान और भुगतान से आगे ले जाकर आजीविका तक पहुँचाना है।

अब मुख्य फोकस उत्पादकता और बाजार पहुंच पर होगा, जिससे छोटे व्यापारियों और किसानों को सीधा लाभ मिल सके।

यह प्रारूप दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में विकास केवल नई तकनीकों के आविष्कार से नहीं, बल्कि उनके समन्वय से होगा।

एक ऐसा संयोजी ढांचा तैयार किया जा रहा है जो नवाचार को एक साथ काम करने और तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम बनाएगा।

खुले डिजिटल बुनियादी ढांचे को विश्वसनीय डेटा प्रवाह के साथ जोड़कर एआई जैसी तकनीकों को आम नागरिकों तक पहुँचाया जाएगा।

यह छोटे उद्यमों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करेगा, जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो सकेंगे।

यह भारत की डिजिटल यात्रा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो केवल समावेशन से आगे बढ़कर क्षमता और अवसरों पर केंद्रित है।

नीति आयोग के नेतृत्व का विजन और दृष्टिकोण

"अब ध्यान जीडीपी से उत्पादकता पर केंद्रित हो गया है; उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार और बेहतर जीवन स्तर इसी पर निर्भर करते हैं।"

उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि भारत के विकास का अगला चरण एआई और डीपीआई के सफल एकीकरण द्वारा परिभाषित किया जाएगा।

प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने विज्ञान और नवाचार को विश्वसनीय सार्वजनिक परिणामों में बदलने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि भारत के डीपीआई ने जनसंख्या स्तर पर खुले और अंतरसंचालनीय प्रणालियों की अद्वितीय शक्ति का प्रदर्शन किया है।

अगले चरण में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को मजबूत वैज्ञानिक सटीकता और सुरक्षा उपायों के साथ एकीकृत करने की योजना है।

सुश्री निधि छिब्बर ने बताया कि इस प्रारूप का एक बड़ा हिस्सा राज्यों को उनके डिजिटल परिवर्तन में सहयोग देने पर केंद्रित है।

उनका मानना है कि जब राज्य तेजी से विकास करेंगे, तभी भारत समग्र रूप से विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

राज्यों के लिए डीपीआई एक ऐसा उपकरण बनेगा जो समावेशी विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा और भारत की रणनीतिक स्थिति

सुश्री देबजानी घोष ने वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि अब प्रतिस्पर्धा केवल चिप्स और पूंजी तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल ढांचे के व्यापक प्रभाव पर निर्भर है।

भारत के पास अपनी डीपीआई, एआई और उद्यमिता को मिलाकर एक शक्तिशाली संरचनात्मक लाभ मौजूद है जो उसे अग्रणी बनाएगा।

एआई को अपनाने का एक स्थानीय और समावेशी मॉडल विकसित किया जाएगा जो भारतीय नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाएगा।

यह मॉडल विशेष रूप से आजीविका को मजबूत करने और महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।

नीति फ्रंटियर टेक हब इस दिशा में एक सक्रिय मंच के रूप में कार्य कर रहा है जो भविष्य के तकनीकी परिवर्तनों का पूर्वानुमान लगाएगा।

यह हब सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के साथ मिलकर 20 से अधिक क्षेत्रों में 10 वर्षीय प्रारूप तैयार कर रहा है।

अंततः, प्राथमिकता अब क्रियान्वयन पर है, जिसे जिला स्तर पर स्थानीय वास्तविकताओं के आधार पर लागू किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।

यह रोडमैप भारत को 2047 तक एक समृद्ध और तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ठोस आधार प्रदान करता है।

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