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कंकाल लेकर बैंक पहुँचा भाई!: ओडिशा: बहन के कंकाल के साथ बैंक पहुँचा भाई, बैंक ने दी सफाई

thinQ360 · 28 अप्रैल 2026, 07:51 शाम
ओडिशा के केओंझर में पैसे निकालने के लिए भाई ने किया अनोखा विरोध, बैंक ने आरोपों को नकारा।

केओंझर | ओडिशा के केओंझर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहाँ एक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत बहन के कंकाल अवशेषों को लेकर बैंक पहुँच गया।

अजीबोगरीब विरोध प्रदर्शन की शुरुआत

यह घटना केओंझर जिले के मल्लीपोसी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में हुई, जहाँ जीतू मुंडा नाम का व्यक्ति अपनी बहन कलारा मुंडा के खाते से पैसे निकालना चाहता था।
जीतू मुंडा का दावा था कि बैंक कर्मचारियों ने उसे उसकी बहन को व्यक्तिगत रूप से बैंक लाने के लिए मजबूर किया, जबकि उसकी मृत्यु हो चुकी थी।
इस स्थिति से नाराज होकर जीतू अपनी बहन के अवशेषों को कब्र से निकालकर एक बोरी में भरकर बैंक के गेट पर पहुँच गया।

बैंक द्वारा आरोपों का खंडन

जैसे ही यह खबर मीडिया में फैली, इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने इस पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया जारी की और इसे भ्रामक बताया।
बैंक ने स्पष्ट किया कि यह शाखा उनके प्रायोजित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, ओडिशा ग्रामीण बैंक के अंतर्गत आती है और वहाँ के कर्मचारियों ने कभी ऐसी मांग नहीं की।

"बैंक ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों ने कभी भी मृत महिला को लाने की मांग नहीं की थी और यह आरोप पूरी तरह गलत हैं।"

घटनाक्रम का आधिकारिक विवरण

बैंक के अनुसार, जीतू मुंडा पहली बार जब बैंक आया, तो उसने अपनी बहन के खाते से पैसे निकालने की इच्छा जताई थी।
बैंक अधिकारियों ने उसे समझाया कि किसी अन्य व्यक्ति के खाते से पैसा निकालना नियमों के विरुद्ध है, जब तक कि उचित प्रक्रिया का पालन न किया जाए।
जब जीतू ने बताया कि उसकी बहन की मृत्यु हो चुकी है, तो उसे मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी के दस्तावेज जमा करने को कहा गया।

नशे की हालत में हंगामा

बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, जीतू मुंडा दूसरी बार बैंक पहुँचा तो वह कथित तौर पर नशे की हालत में था और उसने शाखा में काफी हंगामा किया।
उसने बैंक के बाहर अपनी बहन के कंकाल अवशेषों को रख दिया और चिल्लाने लगा कि वह अपनी बहन को बैंक ले आया है।
इस दृश्य को देखकर बैंक में मौजूद अन्य ग्राहक और कर्मचारी दहशत में आ गए, जिसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई।

प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियां

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को संभाला और जीतू को शांत कराया, साथ ही अवशेषों को सम्मानजनक तरीके से वहाँ से हटवाया गया।
यह मामला ग्रामीण भारत में बैंकिंग नियमों की समझ और प्रशासनिक जटिलताओं के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
अक्सर आदिवासी क्षेत्रों में लोगों को यह पता नहीं होता कि मृत्यु के बाद बैंक खाते से पैसा निकालने की कानूनी प्रक्रिया क्या होती है।

बैंक खातों के लिए नामांकन का महत्व

इस घटना ने एक बार फिर बैंकिंग प्रणाली में 'नॉमिनेशन' या नामांकन की आवश्यकता पर बहस छेड़ दी है।
अगर बैंक खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज होता, तो जीतू मुंडा को शायद इतनी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
बैंकों का कहना है कि वे केवल खाताधारक के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियमों का पालन करते हैं।

मृत्यु के बाद दावा निपटान प्रक्रिया

किसी खाताधारक की मृत्यु के बाद, बैंक को सूचित करना और मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करना सबसे पहला और अनिवार्य कदम होता है।
इसके बाद, यदि कोई नॉमिनी है, तो उसे अपनी पहचान साबित करनी होती है और पैसा उसे हस्तांतरित कर दिया जाता है।
यदि नॉमिनी नहीं है, तो परिवार को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या कानूनी उत्तराधिकारी का दस्तावेज प्रस्तुत करना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का अभाव

केओंझर जैसी जगहों पर साक्षरता और विशेष रूप से वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण ऐसी अप्रिय स्थितियाँ पैदा होती हैं।
जीतू मुंडा जैसे लोगों को लगता है कि बैंक जानबूझकर उन्हें परेशान कर रहे हैं, जबकि बैंक केवल कानूनी प्रोटोकॉल का पालन करते हैं।
स्थानीय प्रशासन अब जीतू की मदद कर रहा है ताकि उसकी बहन का मृत्यु प्रमाण पत्र जल्द से जल्द बन सके।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका

जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित विभाग को प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।
बैंक ने भी आश्वासन दिया है कि जैसे ही जरूरी दस्तावेज मिल जाएंगे, दावे का निपटान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं, जहाँ लोग बैंकिंग जटिलताओं पर सवाल उठा रहे हैं।

भविष्य के लिए सबक

बैंकों को चाहिए कि वे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में नियमों को समझाने के लिए अधिक सरल और स्थानीय भाषा का उपयोग करें।
वहीं, नागरिकों को भी अपने बैंक खातों में नॉमिनी अपडेट रखने की सलाह दी जाती है ताकि उनके परिजनों को भविष्य में कष्ट न हो।
यह घटना मानवीय संवेदनाओं और कठोर कानूनी नियमों के बीच के टकराव का एक दुखद उदाहरण बन गई है।

निष्कर्ष

अंततः, जीतू मुंडा की यह कार्रवाई उसकी हताशा का परिणाम थी, लेकिन बैंक ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता।
उम्मीद है कि प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद उसे जल्द ही अपनी बहन के खाते में जमा राशि प्राप्त हो जाएगी।

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