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ऑपरेशन हार्डबॉल: लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर 'ऑपरेशन हार्डबॉल', US को मिली लिस्ट

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 09 जुलाई 2026, 09:32 सुबह
भारतीय और अमेरिकी एजेंसियों ने 'ऑपरेशन हार्डबॉल' शुरू किया है। लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग के गुर्गों और उनके विदेशी ठिकानों की लिस्ट साझा की गई है।

'ऑपरेशन हार्डबॉल': लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर भारत-अमेरिका का शिकंजा

अहमदाबाद | विदेशों में बैठकर भारत में अपराध करने वाले गैंगस्टरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन हार्डबॉल' नाम दिया गया है, जिसके तहत भारतीय और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के नेटवर्क पर नकेल कस रही हैं।

एजेंसियों ने साझा की अहम जानकारी

इस ऑपरेशन के तहत, भारतीय खुफिया और केंद्रीय एजेंसियों ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग के गुर्गों की एक विस्तृत सूची तैयार की है।

इस लिस्ट में सिर्फ गैंगस्टरों के नाम ही नहीं, बल्कि विदेशों में उनके संभावित ठिकानों का पूरा कच्चा-चिट्ठा भी शामिल है। दोनों देशों की एजेंसियों ने इस जानकारी को मिलकर सत्यापित किया है।

जेल से मांगी 5 मिलियन डॉलर की रंगदारी

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने बुधवार को एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गुजरात के अहमदाबाद स्थित हाई-सिक्योरिटी वाली साबरमती जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने अमेरिका में अपने गुर्गों को व्हाट्सएप कॉल किए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, बिश्नोई ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच जेल के अंदर से कई फोन कॉल और मैसेज किए। इन कॉल्स के दौरान गैंगस्टर ने 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम रंगदारी की मांग की थी।

निज्जर की हत्या में भी आया नाम

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में छिपे उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विभाग के मुताबिक, इन दोनों ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था।

अमेरिकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिश्नोई का सिंडिकेट लगातार प्रमुख धार्मिक, सामाजिक और सियासी नेताओं को अपना निशाना बनाता है।

खौफ पैदा कर वसूली का खेल

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, लॉरेंस और बराड़ इन हाई-प्रोफाइल वारदातों का इस्तेमाल समाज में खौफ पैदा करने और फिर रंगदारी वसूलने के लिए करते हैं।

साबरमती जेल से चलता है पूरा रैकेट

अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि लॉरेंस बिश्नोई अपना पूरा गैंग जेल में बैठे-बैठे ही चलाता है।

उसने अपनी जेल की कोठरी में तस्करी कर लाए गए प्रतिबंधित सेलफोन और वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) का इस्तेमाल करके अमेरिका में हत्याओं, गोलीबारी और जबरन वसूली जैसी वारदातों को अंजाम दिया है।

NIA ने भी की थी पुष्टि

साल 2022 में भारतीय जांच एजेंसी NIA ने भी कहा था कि लॉरेंस बिश्नोई जेल के अंदर से गैंग का पूरा ऑपरेशन चलाने में बेहद माहिर है।

यही एक बड़ी वजह है कि उसने आज तक किसी भी कोर्ट में अपनी जमानत की अर्जी नहीं लगाई है। हालांकि, बिश्नोई के वकील का कहना है कि उस पर इतने केस दर्ज हैं कि कोई भी उसकी जमानत का बॉन्ड भरने के लिए आगे नहीं आता, इसलिए उसने अर्जी नहीं दी है।

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