बालोतरा | राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में स्थित रिफाइनरी प्रोजेक्ट सोमवार को एक बड़े हादसे का गवाह बना। दोपहर के समय यहाँ एक जोरदार धमाका हुआ जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।
धमाके से दहला रिफाइनरी परिसर
दोपहर 1:47 बजे रिफाइनरी की CDU-VDU यूनिट में अचानक एक्सचेंजर फट गया। धमाका इतना तेज था कि इसकी गूँज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। लपटें इतनी ऊंची थीं कि इन्हें रेगिस्तान के धोरों से साफ देखा जा सकता था। परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ने लगे।
CISF की 3 मिनट की जांबाजी
जैसे ही खतरे का सायरन बजा, CISF की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तत्काल एक्शन में आ गई। जवानों ने बिना एक सेकंड गंवाए घटनास्थल की ओर कूच किया। अगले 180 सेकंड में जवानों ने मैन्युअल तरीके से फायर फाइटिंग सिस्टम चालू कर दिया। यही वह 'गोल्डन टाइम' था जिसने पूरे प्रोजेक्ट को राख होने से बचा लिया। जवानों ने आग के चारों ओर पानी की एक सुरक्षा दीवार बना दी। इससे आग को पास की अन्य संवेदनशील पेट्रोकेमिकल यूनिट्स तक पहुँचने से रोका जा सका।
भीषण आग और रेस्क्यू ऑपरेशन
आग की लपटें आसमान छू रही थीं और काला धुआं वातावरण में फैल गया था। बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के इलाकों से तुरंत 35 दमकल गाड़ियां बुलाई गईं। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस भीषण 'अग्नि युद्ध' के बाद दोपहर 3:30 बजे आग पर पूरी तरह काबू पाया गया। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।
बड़ी तबाही का टला खतरा
अधिकारियों के अनुसार, अगर CISF के जवान शुरुआती मिनटों में मुस्तैद न होते, तो आग को काबू करना लगभग नामुमकिन हो जाता और करोड़ों का नुकसान होता। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकार्पण के लिए प्रस्तावित है। जवानों की इस तत्परता और साहस की अब विभाग और प्रशासन द्वारा सराहना की जा रही है। इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। CISF की सतर्कता से अरबों रुपये की संपत्ति और राजस्थान का भविष्य सुरक्षित रहा।