पाली | राजस्थान के पाली जिले के बाली विधानसभा क्षेत्र के भाटूंड़ गांव में रविवार को आस्था और सेवा का संगम देखने को मिला। कृष्ण गौ-सेवा संस्था द्वारा आयोजित 'भामाशाह सम्मान समारोह' में गौ-भक्तों का उत्साह चरम पर था।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने क्षेत्र के भामाशाहों और गौ-भक्तों से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।
मंत्री ने किया 100 भामाशाहों का सम्मान
मंत्री कुमावत ने वर्ष 1997 में स्थापित इस गौशाला में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले 100 भामाशाहों का सम्मान किया। उन्होंने सभी दानदाताओं को स्मृति चिन्ह, फूल मालाएं और दुपट्टा ओढ़ाकर उनकी सेवा भावना की सराहना की।
वर्ष 1997 में स्थापित इस गौशाला ने क्षेत्र में गौ-सेवा की एक मिसाल पेश की है। इतने वर्षों का सफर भामाशाहों के निस्वार्थ सहयोग के बिना संभव नहीं था, जिसे मंत्री ने रेखांकित किया।
गौ-सेवा है संस्कृति का आधार
मंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गौमाता का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने गौ-संरक्षण और संवर्धन को हर नागरिक का नैतिक दायित्व और पुण्य का कार्य बताया।
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। सरकार गौशालाओं के सशक्तिकरण और गौवंश के पोषण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
गौ-सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि हमारी आस्था और संवेदनाओं से जुड़ा पवित्र दायित्व है। यह आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और पुण्य प्राप्ति का सबसे सशक्त माध्यम है।
समाज की जिम्मेदारी और गौ-संरक्षण
कुमावत ने कहा कि गाय को पहली रोटी खिलाना और घायल गौवंश का उपचार करना मानवता की सच्ची सेवा है। उन्होंने लोगों से गौ-संरक्षण का संकल्प लेने और सेवा भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
राजस्थान सरकार ने गौ-संरक्षण के उद्देश्य से ही विशेष गोपालन विभाग का गठन किया है। इससे गौशालाओं के पोषण और देखभाल में बड़ी मदद मिल रही है, जो एक सराहनीय प्रयास है।
दानदाताओं का विवरण और आभार
गौशाला के अध्यक्ष कैलाश कुमावत ने बताया कि समारोह में दो श्रेणियों में सम्मान दिया गया। इसमें एक लाख से अधिक की राशि का सहयोग देने वाले 21 स्वर्ण भामाशाहों का अभिनंदन किया गया।
वहीं, एक लाख रुपये से कम की राशि का सहयोग करने वाले 79 सिल्वर भामाशाहों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने गौशाला परिसर की व्यवस्थाओं को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।
यह समारोह न केवल दानदाताओं के सम्मान का प्रतीक था, बल्कि इसने समाज में सेवा और समर्पण की भावना को भी नई ऊर्जा दी। भाटूंड़ गांव की यह पहल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।
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