राजस्थान

ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध: हड़ताल: पाली: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 1500 मेडिकल स्टोर बंद

desk · 20 मई 2026, 07:18 शाम
केमिस्टों ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और पीएम के नाम ज्ञापन सौंपा।

पाली | राजस्थान के पाली जिले में गुरुवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्टों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान पर जिले के करीब 1500 मेडिकल स्टोर संचालकों ने व्यापार ठप कर विरोध जताया।

केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने सूरजपोल स्थित बांगड़ हॉस्पिटल से कलेक्ट्रेट तक एक विशाल रैली निकाली। इस दौरान व्यापारियों ने ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना आक्रोश व्यक्त किया।

कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और ज्ञापन

एसोसिएशन के अध्यक्ष धनंजय चौधरी के नेतृत्व में केमिस्टों ने जिला कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

हड़ताल के दौरान पाली शहर सहित ग्रामीण इलाकों में भी दवा की दुकानें बंद रहीं। राहत की बात यह रही कि मरीजों की सुविधा के लिए जन औषधि केंद्र और सहकारी समितियों की दुकानों को खुला रखा गया था।

छोटे व्यापारियों पर संकट का दावा

केमिस्टों का तर्क है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा दी जा रही अत्यधिक छूट से स्थानीय दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। इससे छोटे व्यापारियों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए समान नियम नहीं होने से छोटे केमिस्टों को भारी नुकसान हो रहा है। सरकार को इस पर तुरंत लगाम लगानी चाहिए और छोटे व्यापारियों का संरक्षण करना चाहिए।

केमिस्टों की मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारियों ने अवैध ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ कठोर कार्रवाई और बिना वैध ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी बंद करने की मांग की। साथ ही, जीएसआर 817 (ई) और जीएसआर 220 को वापस लेने पर जोर दिया।

इस रैली में सचिव मनीष जैन, कोषाध्यक्ष मनोज खेमलानी और उपाध्यक्ष ललित कुमार सहित सैकड़ों मेडिकल संचालक शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में ऑनलाइन दवा व्यापार की अनियंत्रित नीतियों का विरोध किया।

निष्कर्ष और प्रभाव

यह एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल दवा व्यापारियों की एकजुटता को दर्शाती है। केमिस्टों का मानना है कि दवाओं की होम डिलीवरी सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरी हो सकती है। यदि सरकार इन मांगों पर विचार नहीं करती है, तो भविष्य में और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

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