राजस्थान

पाली: मासूम को गलत ब्लड चढ़ाया: पाली: 5 साल की मासूम को चढ़ाया गलत ब्लड, अस्पताल की लापरवाही

thinQ360 · 20 मई 2026, 08:56 रात
पाली के बांगड़ अस्पताल में बड़ी लापरवाही, ओ पॉजिटिव की जगह चढ़ाया बी पॉजिटिव खून।

पाली | राजस्थान के पाली जिले स्थित बांगड़ अस्पताल में चिकित्सा विभाग की एक बेहद गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ एक पांच साल की मासूम बच्ची, जो थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है, उसे गलत ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया।

अस्पताल की बड़ी लापरवाही: ओ-पॉजिटिव को चढ़ाया बी-पॉजिटिव

पाली के बांगड़ अस्पताल में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक मासूम बच्ची को गलत ब्लड चढ़ा दिया गया। बच्ची का असली ब्लड ग्रुप ओ-पॉजिटिव था, लेकिन नर्सिंग स्टाफ ने उसे बी-पॉजिटिव खून चढ़ाना शुरू कर दिया।

यह घटना अस्पताल के वार्ड में दोपहर करीब 1 बजे के आसपास हुई। परिजनों के अनुसार, बच्ची को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है। बुधवार को भी उसे इसी प्रक्रिया के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

जैसे ही नर्सिंग स्टाफ ने ब्लड चढ़ाना शुरू किया, कुछ ही मिनटों में बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। उसने अपनी मां से सिर में तेज दर्द और शरीर में कंपकंपी होने की शिकायत की, जिससे मां तुरंत सतर्क हो गई।

मां की सजगता ने बचाई मासूम की जान

बच्ची की मां ने बताया कि खून चढ़ना शुरू होने के पांच मिनट के भीतर ही मासूम ने असहज महसूस करना शुरू कर दिया था। जब मां ने ध्यान से ब्लड बैग देखा, तो उस पर बी-पॉजिटिव लिखा हुआ था।

मां ने तुरंत शोर मचाया और नर्सिंग स्टाफ को इसकी जानकारी दी। आनन-फानन में खून चढ़ाना बंद किया गया और बच्ची को तुरंत पीआईसीयू (PICU) वार्ड में शिफ्ट किया गया। मां की इस सतर्कता ने एक बड़ा हादसा टाल दिया।

बच्ची ने खून चढ़ाते वक्त मां से शिकायत की थी कि उसे सिर दर्द हो रहा है। मां ने बोतल देखी तो भागती हुई बाहर गई और नर्स को बुलाया। इसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई।

कलेक्टर से शिकायत और जांच कमेटी का गठन

इस गंभीर लापरवाही के बाद बच्ची के माता-पिता ने जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अस्पताल प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

बांगड़ हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. कैलाश परिहार ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस टीम में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मांगीलाल चौधरी, डॉ. मनोज कुमार और डॉ. गरिमा शामिल हैं।

यह कमेटी जांच करेगी कि ब्लड बैंक से गलत ग्रुप का खून कैसे जारी हुआ और वार्ड में उसे चढ़ाने से पहले क्रॉस-चेक क्यों नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।

डॉक्टरों की टीम कर रही है बच्ची की निगरानी

फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार उसकी सेहत पर नजर रखे हुए है। डॉ. एसएन स्वर्णकार, डॉ. निधि कौशल और डॉ. अनिशा मीणा की टीम बच्ची की निगरानी कर रही है।

थैलेसीमिया पीड़ित इस बच्ची को महीने में दो बार खून चढ़ाना पड़ता है। परिजनों ने बताया कि उन्हें बच्ची की बीमारी के बारे में तब पता चला था जब वह केवल तीन साल की थी। तब से उसका इलाज जारी है।

चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त बनाएंगे।

इस घटना ने अस्पताल के ब्लड बैंक और नर्सिंग स्टाफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो जाए और दोषियों को सजा मिले।

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