करौली | करौली जिले के सबसे बड़े पांचना बांध के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। शुक्रवार को बांध परिसर में आयोजित विशाल किसान महापंचायत में किसानों ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है।
पांचना बांध पर किसानों की हुंकार
गुड़ला-पांचना संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस महापंचायत में हजारों की संख्या में किसान एकत्रित हुए। किसानों ने एक सुर में 39 गांवों के लिए पानी की मांग उठाई।
किसानों का कहना है कि जब तक इन गांवों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचता, तब तक बांध के गेट नहीं खुलने दिए जाएंगे। इस फैसले से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
महापंचायत की अध्यक्षता गिरधर पटेल मूंडिया ने की। इसमें करौली के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने अपनी पीड़ा साझा की और एकजुटता का संकल्प लिया।
विस्थापन का दर्द और पानी का अधिकार
किसान नेताओं ने कहा कि पांचना बांध के निर्माण के समय स्थानीय किसानों ने अपनी उपजाऊ भूमि का बलिदान दिया था। उनकी जमीनें और घर इस परियोजना की भेंट चढ़ गए।
विडंबना यह है कि जिन किसानों की जमीन पर बांध बना, आज उन्हीं के खेत सूखे पड़े हैं। किसानों ने इसे अपने अधिकारों का हनन करार दिया है।
राजनीतिक दिग्गजों का मिला समर्थन
इस आंदोलन को राजनीतिक गलियारों से भी भारी समर्थन मिल रहा है। करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर और विजय बैसला जैसे नेताओं ने महापंचायत में शिरकत की।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष शरदो गुर्जर और सामाजिक कार्यकर्ता बबलू शुक्ला ने भी किसानों की मांगों को जायज ठहराया। नेताओं ने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।
विधायक दर्शन सिंह गुर्जर ने कहा कि वह किसानों की इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करने की सलाह दी है।
"हम सरकार से लगातार क्षेत्र के 39 गांवों को पानी देने की मांग कर रहे हैं। बांध निर्माण में हमारी जमीन गई और हमारे ही खेतों को पानी नहीं मिल रहा। पहले इन गांवों को पानी मिले, तभी बांध से पानी छोड़ने दिया जाएगा।" - अशोक सिंह धाभाई, अध्यक्ष, संघर्ष समिति
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
पांचना बांध से पानी छोड़ने को लेकर अक्सर दो क्षेत्रों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती है। एक तरफ कमांड एरिया के किसान हैं, तो दूसरी तरफ 39 गांवों के संघर्षी किसान।
किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी अनदेखी की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। बांध स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
क्षेत्र के किसानों का तर्क है कि सिंचाई के अभाव में उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं। पशुपालन और कृषि पर निर्भर इन परिवारों के लिए पानी जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है।
भविष्य की रणनीति और संघर्ष
संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि यदि अगले कुछ दिनों में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे महापड़ाव डालेंगे। किसान अब किसी भी मौखिक आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।
महापंचायत में सियाराम गुर्जर, हाकिम सिंह बैसला और जनक सिंह जैसे अनुभवी नेताओं ने भी विचार रखे। उन्होंने युवाओं से इस संघर्ष में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
निष्कर्षतः, पांचना बांध का जल विवाद अब करौली की राजनीति का केंद्र बन गया है। किसानों का यह अल्टीमेटम सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।
आने वाले दिनों में यदि समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है। सभी की नजरें अब सरकार के अगले कदम और प्रशासन की मध्यस्थता पर टिकी हुई हैं।
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