करौली | राजस्थान के करौली जिले में स्थित एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध यानी पांचना बांध से आखिरकार मंगलवार सुबह ठीक 5 बजे नहरों में सिंचाई के पानी की निकासी शुरू कर दी गई है।
इससे पहले सोमवार को जल संसाधन मंत्री द्वारा बांध के गेट खोलने के कुछ ही घंटों बाद आई तकनीकी खराबी के चलते पानी का प्रवाह रुक गया था।
तकनीकी खराबी से भड़का था किसानों का गुस्सा
सोमवार दोपहर को जैसे ही मुख्य गेट वापस नीचे गिर गया और पानी का प्रवाह रुका, कमांड क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश फैल गया।
गुस्साए किसानों ने करौली जिले के कुसाय, गाधौली, कैमला और कटकड़ मोड़ सहित हिंडौन-महावीरजी-नादौती मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े करके चक्काजाम कर दिया।
सोमवार पूरी शाम इन रास्तों पर भारी ट्रैफिक जाम रहा और किसान लगातार प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी।
NDRF और गोताखोरों ने रातभर किया काम
इस गंभीर तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया। एनडीआरएफ की टीम और विशेष गोताखोरों को आपातकालीन स्थिति में मौके पर बुलाया गया।
जल संसाधन विभाग जयपुर के अधीक्षण अभियंता विजय कुमार शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी साझा की है।
"भारी बारिश और अंधेरे के बीच बांध के मुख्य गेट की खराबी को दूर करना चुनौतीपूर्ण था। तकनीकी टीम रातभर बांध पर ही डटी रही।" - विजय कुमार शर्मा, अधीक्षण अभियंता
पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी और जल संसाधन विभाग की टीम ने पूरी रात कड़ी मशक्कत की। तड़के 5 बजे गेट को सफलतापूर्वक चालू किया जा सका।
20 साल बाद खेतों तक पहुंचेगा पानी
पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने की खबर से कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी के किसानों में भारी उत्साह है।
पिछले 20 साल से पानी का इंतजार कर रहे हजारों किसानों के चेहरों पर दोबारा खुशी लौट आई है। खेतों तक पानी पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और रातभर चली मरम्मत के बाद अब नहरों में पानी की सप्लाई पूरी तरह बहाल कर दी गई है, जिससे किसानों ने राहत की सांस ली है।
*Edit with Google AI Studio