राजनीति

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल: संसद का विशेष सत्र: 33% महिला आरक्षण और परिसीमन बिल 2026 पेश करेगी सरकार, विपक्ष ने घेरा

बलजीत सिंह शेखावत · 16 अप्रैल 2026, 10:18 दोपहर
संसद के 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष सत्र में सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पेश करेगी। राहुल गांधी और विपक्ष ने जाति जनगणना के मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

नई दिल्ली | संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होगा। इसमें केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम और परिसीमन विधेयक-2026 पेश करने की तैयारी में है। यह सत्र देश की राजनीतिक दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल

सरकार इस सत्र में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने हेतु तीन बड़े बिल लाएगी। परिसीमन आयोग को राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या तय करने का अधिकार दिया जाएगा।

यह कदम 2029 के चुनावों से पहले लोकसभा और विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है। इससे चुनावी राजनीति में बड़ा संवैधानिक बदलाव आने की उम्मीद है।

विपक्ष का कड़ा विरोध

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इन विधेयकों का पुरजोर विरोध करने का एलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि देश को एक बड़े 'राजनीतिक भूकंप' के लिए तैयार रहना चाहिए।

विपक्ष विशेष रूप से संविधान संशोधन विधेयक को हर संभव तरीके से रोकने का प्रयास करेगा। उनका आरोप है कि सरकार इसके जरिए सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

राहुल गांधी के सवाल

राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आरक्षण के लिए 2011 की पुरानी जनगणना का उपयोग किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह अनुचित है।

उन्होंने मांग की है कि महिला आरक्षण को वर्तमान जाति जनगणना और ओबीसी आंकड़ों के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। राहुल ने इसे पिछड़े वर्गों के अधिकारों का हनन बताया।

कांग्रेस का रुख और ओबीसी कोटा

कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन वे इसमें ओबीसी कोटे की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार पिछड़े वर्गों के वास्तविक आंकड़ों को छिपा रही है।

उनका आरोप है कि परिसीमन और गेरीमैंडरिंग के जरिए सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। यह मुद्दा आगामी सत्र के दौरान सदन में काफी गरमाने वाला है।

सत्र की अहमियत और भविष्य

यह विशेष सत्र भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार की योजना है कि इन विधेयकों को सत्र के पहले हफ्ते में ही पारित करवा लिया जाए।

इसमें होने वाले फैसले आगामी चुनावों की दिशा और दशा तय करेंगे। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए देश की नजरें अब 16 अप्रैल पर टिकी हैं।

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