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तेल का खेल: महंगाई की नई लहर: पेट्रोल-डीजल की मार: 11 दिन में 4 बार बढ़े दाम, ट्रक थमे

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 26 मई 2026, 10:49 दोपहर
15 मई से अब तक तेल 7.5 रुपये महंगा हुआ, 20% ट्रक सड़कों से गायब।

नई दिल्ली | देश में ईंधन की कीमतों में लगी आग अब आम आदमी की रसोई तक पहुँचने वाली है। पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में चार बार इजाफा हुआ है।

इससे माल ढुलाई का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। 15 मई से 25 मई के बीच तेल की कीमतों ने सबको चौंका दिया है। इस अवधि में पेट्रोल-डीजल कुल 7.50 रुपये महंगे हुए हैं।

11 दिन और 4 बड़े झटके

25 मई को हुई ताजा बढ़ोतरी में पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये महंगा हुआ। इससे पहले 15 मई को भी 3-3 रुपये की बड़ी बढ़त देखी गई थी।

19 मई और 23 मई को भी कीमतों में करीब 90 पैसे का इजाफा हुआ था। यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे जनता और व्यापारी दोनों ही परेशान हैं।

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, इसका सीधा बोझ अब आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।

सड़कों से गायब हुए ट्रक

डीजल की बढ़ती कीमतों का सबसे बुरा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ा है। देश के लगभग 95 लाख ट्रकों में से 20 फीसदी अब सड़कों पर नहीं दिख रहे हैं।

छोटे ट्रक ऑपरेटरों के लिए अब गाड़ी चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। डीजल की कमी और ऊँची कीमतों ने उनके पहिये थाम दिए हैं।

ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री का 70 फीसदी हिस्सा छोटे ऑपरेटरों के पास है। लागत बढ़ने से वे अपनी किश्तें और रोजमर्रा के खर्च निकालने में पूरी तरह असमर्थ हो रहे हैं।

"डीजल की कुल परिचालन लागत में 45 फीसदी हिस्सेदारी होती है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी छोटे ऑपरेटरों की कमर तोड़ रही है।" - हरीश सभरवाल, अध्यक्ष, AIMTC

शहरों में तेल के दाम का हाल

दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये पर पहुँच गया है। वहीं मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये के पार चली गई है।

चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में भी कीमतें 100 रुपये के पार हैं। हैदराबाद में तो पेट्रोल 115.73 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर बिक रहा है।

बेंगलुरु और जयपुर में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यहाँ भी ईंधन की कीमतें आम आदमी के बजट को बिगाड़ रही हैं। स्थानीय करों के कारण कीमतें अलग-अलग हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी और कारण

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि नुकसान की भरपाई जरूरी थी। मिडिल ईस्ट में तनाव ने कच्चे तेल के बाजार में हलचल मचा दी है।

सरकारी तेल कंपनियाँ पिछले कई महीनों से महंगा क्रूड खरीद रही थीं। एम्के ग्लोबल ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कीमतें 10 रुपये और बढ़ सकती हैं।

अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा। तेल कंपनियों का घाटा कम करने का बोझ अब सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।

महंगाई की नई लहर का खतरा

जब ट्रक सड़कों से हटते हैं, तो माल ढुलाई की दरें बढ़ जाती हैं। इसका सीधा असर आपकी थाली पर पड़ने वाला है। सब्जियां और फल महंगे हो सकते हैं।

दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। छोटे व्यापारियों का मानना है कि आने वाले हफ्ते बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होंगे।

ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी लागत भी बढ़ने की संभावना है। कुल मिलाकर, पेट्रोल-डीजल की यह बढ़त हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है और जनता में भारी रोष है।

पेट्रोल और डीजल की यह बढ़ती कीमतें केवल ईंधन का मुद्दा नहीं हैं। यह एक बड़े आर्थिक संकट की आहट है। अगर कीमतें कम नहीं हुईं, तो जीना मुहाल हो जाएगा।

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