फलोदी | राजस्थान के फलोदी शहर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है।
नगर परिषद फलोदी ने शहर के विभिन्न वार्डों में स्थित खाली भूखंडों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है।
इस आदेश के तहत उन सभी भूखंड मालिकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है जिन्होंने अपने प्लॉट लावारिस छोड़ रखे हैं।
प्रशासन का सख्त रुख
नगर परिषद आयुक्त अनिल विश्नोई ने बताया कि शहर के बीचों-बीच स्थित खाली प्लॉट अब बड़ी समस्या बन चुके हैं।
इन भूखंडों में वर्षों से कचरा, निर्माण सामग्री का मलबा और कंटीली झाड़ियाँ जमा हो गई हैं।
यह स्थिति न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित कर रही है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है।
स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
खाली प्लॉटों में जमा कचरे और बारिश के पानी के कारण वहां मच्छरों का प्रजनन तेजी से हो रहा है।
इससे शहर में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
स्थानीय निवासियों ने कई बार शिकायत की थी कि इन प्लॉटों की वजह से उनके घरों में कीड़े-मकोड़े आ रहे हैं।
सुरक्षा को लेकर चिंता
गंदगी के अलावा, ये खाली और खुले भूखंड असामाजिक तत्वों के लिए भी शरण स्थली बनते जा रहे हैं।
झाड़-झंखाड़ के कारण रात के समय यहां संदिग्ध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है, जिससे मोहल्ले के लोग डरे रहते हैं।
प्रशासन ने इस सुरक्षा पहलू को ध्यान में रखते हुए चारदीवारी निर्माण को अनिवार्य करने का संकेत दिया है।
जुर्माने का नया प्रावधान
नगर परिषद ने साफ कर दिया है कि अब केवल नोटिस देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सीधी आर्थिक चोट की जाएगी।
यदि कोई मालिक अपने प्लॉट की सफाई नहीं करवाता है, तो नगर परिषद अपनी टीम भेजकर वहां सफाई अभियान चलाएगी।
इस सफाई पर होने वाले कुल खर्च का पांच गुना पैसा संबंधित भूखंड स्वामी से वसूला जाएगा।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
यह पूरी कार्रवाई राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अमल में लाई जाएगी।
आयुक्त ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।
परिषद अब ऐसे डिफॉल्टरों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने बार-बार कहने पर भी ध्यान नहीं दिया है।
फेंसिंग और चारदीवारी अनिवार्य
नगर परिषद ने मालिकों को सुझाव दिया है कि वे अपने भूखंडों की उचित फेंसिंग या चारदीवारी करवाएं।
खुले प्लॉट अक्सर डंपिंग ग्राउंड बन जाते हैं क्योंकि राहगीर वहां कचरा फेंकना आसान समझते हैं।
एक बार बाउंड्री वॉल बन जाने के बाद, बाहरी लोगों द्वारा गंदगी फैलाना मुश्किल हो जाएगा।
स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी
फलोदी शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग दिलाने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
नगर परिषद का लक्ष्य है कि शहर का हर कोना साफ-सुथरा दिखे और डस्टबिन का सही उपयोग हो।
खाली प्लॉटों की सफाई इस बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।
जनभागीदारी की अपील
आयुक्त अनिल विश्नोई ने शहर के जागरूक नागरिकों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि यदि आपके पड़ोस में कोई खाली प्लॉट गंदगी का केंद्र बना है, तो तुरंत परिषद को सूचित करें।
नागरिकों के सहयोग के बिना फलोदी को स्वच्छ और सुंदर बनाना संभव नहीं है।
व्यापारिक क्षेत्रों पर विशेष नजर
शहर के मुख्य बाजारों और व्यापारिक केंद्रों के पास स्थित भूखंडों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
इन क्षेत्रों में कचरे की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यहां के मालिकों को प्राथमिकता पर सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
आने वाले दिनों में नगर परिषद की टीमें औचक निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लेंगी।
निष्कर्ष और भविष्य की योजना
फलोदी प्रशासन की इस सख्ती से भूखंड मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है, लेकिन आम जनता ने इसका स्वागत किया है।
स्वच्छता के प्रति यह जीरो टॉलरेंस की नीति आने वाले समय में शहर की तस्वीर बदल सकती है।
उम्मीद है कि भारी जुर्माने के डर से ही सही, शहर के खाली प्लॉट अब साफ-सुथरे नजर आएंगे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक हर भूखंड स्वच्छ नहीं हो जाता।
शहरवासियों को अब अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वच्छता के इस महायज्ञ में आहुति देनी होगी।