पिण्डवाड़ा | पिंडवाड़ा नगरपालिका चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक पार्टियों और प्रत्याशियों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि यहां रिश्तों और सियासी समीकरणों का भी कड़ा इम्तिहान देखने को मिल रहा है। चुनावी रण में ऐसे परिवार उतर आए हैं जहां घर की चौखट के भीतर तो रिश्ते कायम हैं, लेकिन चुनावी मैदान में हर कोई अपनी अलग सियासी पारी खेल रहा है।
पिंडवाड़ा का चुनावी घमासान: पिंडवाड़ा में रिश्तों पर सियासत भारी, एक घर के तीन दावेदार!
पिंडवाड़ा नगरपालिका चुनाव में सियासी समीकरणों के बीच पारिवारिक रिश्तों की अनोखी परीक्षा हो रही है। एक परिवार से मां, बेटा और बहू अलग-अलग वार्डों से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि दूसरे मामले में भाई भाजपा और बहन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
HIGHLIGHTS
- पिंडवाड़ा नगरपालिका चुनाव में एक ही परिवार से मां, बेटा और बहू तीन अलग-अलग वार्डों से मैदान में हैं।
- संजय गर्ग वार्ड 20 से कांग्रेस प्रत्याशी हैं, जबकि उनकी मां पार्वती वार्ड 22 और पत्नी वर्षा देवी वार्ड 18 से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं।
- दूसरे परिवार में वार्ड 1 से रमेश कुमार भाटिया भाजपा से और उनकी बहन चंदा परमार वार्ड 11 से निर्दलीय प्रत्याशी हैं।
- बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने प्रमुख राजनीतिक दलों का चुनावी गणित बिगाड़ दिया है।
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एक ही घर से मां, बेटा और बहू मैदान में
सबसे दिलचस्प तस्वीर उस परिवार की है, जहां मां, बेटा और बहू तीन अलग-अलग वार्डों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
वार्ड संख्या 22 से पार्वती निर्दलीय प्रत्याशी हैं और उनका चुनाव चिह्न सिलाई मशीन है। वहीं उनके बेटे संजय गर्ग वार्ड संख्या 20 से कांग्रेस के टिकट पर 'हाथ' के निशान के साथ ताल ठोक रहे हैं। दूसरी ओर, संजय की पत्नी वर्षा देवी यानी पार्वती की बहू वार्ड संख्या 18 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं और उनके हिस्से में भी सिलाई मशीन का निशान आया है। यानी एक ही घर, तीन चेहरे, तीन वार्ड और सियासत के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं।
भाई-बहन की राहें भी हुईं जुदा
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एक अन्य परिवार में भी चुनावी तस्वीर बेहद दिलचस्प है। यहां वार्ड संख्या 1 से रमेश कुमार भाटिया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 'कमल' निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, उनकी बहन चंदा परमार अपने ससुराल के वार्ड संख्या 11 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटी हैं और उनका चुनाव चिह्न बांसुरी है।
यहां भी घर एक है लेकिन चुनावी रास्ते अलग-अलग हैं। एक तरफ पार्टी का कैडर और सिंबल है, तो दूसरी तरफ निर्दलीय पहचान और व्यक्तिगत जनाधार की आजमाइश है।
निर्दलीयों ने बिगाड़ा सियासी गणित
पिंडवाड़ा में निर्दलीय प्रत्याशियों की भरमार ने प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा रखी है। कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार मुकाबले को सीधा न रखकर त्रिकोणीय और बहुकोणीय बनाने की स्थिति में हैं।
ऐसे में पार्टी के परंपरागत वोट बैंक, प्रत्याशी की अपनी व्यक्तिगत पकड़ और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा—तीनों की कड़ी परीक्षा होनी तय है। अब पिंडवाड़ा के सियासी गलियारों में चर्चा यही है कि रिश्ते केवल घर तक सीमित रहेंगे या वोट की राजनीति में भी साथ निभाएंगे। इसका अंतिम फैसला ईवीएम खुलने के बाद जनता के जनादेश से ही तय होगा।
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