नई दिल्ली | भारत सरकार की महत्वाकांक्षी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने देश के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में इस योजना की सफलता के ताजा आंकड़े साझा किए हैं।
सरकार ने देश में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए 14 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पीएलआई योजनाओं को लागू किया है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य निर्यात को प्रोत्साहित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारी प्रोत्साहन
31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सरकार ने लगभग 15,554 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए हैं। यह राशि बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आईटी हार्डवेयर 2.0 के तहत दी गई है।
वहीं, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स क्षेत्र में भी सरकार ने सक्रियता दिखाई है। इस क्षेत्र के तहत अब तक लगभग 2,377.56 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए जा चुके हैं, जिससे घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिली है।
उत्पादन और निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि
पीएलआई योजनाओं के कारण देश में निवेश की बाढ़ आ गई है। अब तक इन योजनाओं के तहत कुल 2.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। यह भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उत्पादन के मोर्चे पर भी आंकड़े उत्साहजनक हैं। इस वित्तीय वर्ष में दिसंबर 2025 तक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की 59 कंपनियों ने लगभग 2,45,375 करोड़ रुपये का अतिरिक्त उत्पादन दर्ज किया है। यह घरेलू कंपनियों की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी 72 कंपनियों ने मिलकर दिसंबर 2025 तक लगभग 13,126 करोड़ रुपये का अतिरिक्त उत्पादन किया है। कुल मिलाकर, सभी 14 क्षेत्रों में अब तक 20.41 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संचयी उत्पादन और बिक्री हुई है।
रोजगार और निर्यात के नए अवसर
रोजगार सृजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। पीएलआई योजनाओं के माध्यम से 14.39 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। इससे देश की युवा शक्ति को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है।
निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इन योजनाओं के तहत अब तक 8.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ है और वैश्विक बाजार में भारत की साख बढ़ी है।
आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की अन्य पहलें
सरकार केवल पीएलआई तक ही सीमित नहीं है। घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए 'सेमिकॉन इंडिया' कार्यक्रम तेजी से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आयात पर निर्भरता को कम करना है।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) और एसपीईसीएस जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। ये योजनाएं क्लस्टर-आधारित इकोसिस्टम का निर्माण कर इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक सुदृढ़ बना रही हैं।
लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे में सुधार
पीएम गति शक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति जैसी पहलें विनिर्माण क्षेत्र को सहायक आधार प्रदान कर रही हैं। इनका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और परिवहन समय में सुधार करना है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।
सरकार 'सिंटर्ड रेयर अर्थ स्थायी मैग्नेट्स' के विनिर्माण और 'राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन' पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। ये कदम भारत की भविष्य की तकनीकी जरूरतों और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए उठाए गए हैं।