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जन औषधि केंद्र: 25,000 का लक्ष्य: प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना: 2027 तक खुलेंगे 25,000 केंद्र, सस्ती दवाओं से बचेगा जनता का पैसा

मानवेन्द्र जैतावत · 27 मार्च 2026, 01:04 दोपहर
भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती बनाने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इसके तहत मार्च 2027 तक केंद्रों की संख्या 25,000 की जाएगी ताकि आम जनता को सस्ती जेनेरिक दवाएं मिल सकें।

नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक नागरिक तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के संकल्प को दोहराया है। इसके लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) को एक मिशन के रूप में चलाया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में उपलब्ध महंगी ब्रांडेड दवाओं के विकल्प के रूप में जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देना है। इससे आम जनता के स्वास्थ्य खर्च में भारी कमी आई है।

किफायती दवाओं का बढ़ता जाल

सरकार द्वारा स्थापित जन औषधि केंद्रों (JAK) पर मिलने वाली जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। यह बचत गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 तक पूरे भारत में कुल 18,646 जन औषधि केंद्र सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। यह नेटवर्क लगातार विस्तार की ओर अग्रसर है।

मध्यप्रदेश के खजुराहो में केंद्रों की स्थिति

मध्यप्रदेश के खजुराहो लोकसभा क्षेत्र में भी इस योजना का व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। यहां वर्तमान में कुल 38 जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय निवासियों को सस्ती दवाएं मिल रही हैं।

जिलेवार वितरण की बात करें तो कटनी जिले में 9 केंद्र सक्रिय हैं। वहीं पन्ना जिले में 4 और छतरपुर जिले में 25 जन औषधि केंद्र जनता की सेवा कर रहे हैं। इन केंद्रों की स्थापना के लिए भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (PMBI) से अनुमोदन अनिवार्य है।

शानदार वित्तीय प्रदर्शन और उपलब्धता

पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2024-25 के दौरान इस योजना ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। देशभर में कुल 4,142 नए जन औषधि केंद्र खोले गए। यह वृद्धि दर्शाती है कि लोग इस योजना के प्रति कितने उत्साहित हैं।

वित्त वर्ष 2024-25 में इन केंद्रों के माध्यम से अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर कुल 2022.47 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पिछले पूरे वित्तीय वर्ष में दवाओं के स्टॉक की कोई कमी नहीं हुई।

दवाओं और उपकरणों का विशाल संग्रह

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत उत्पादों की एक विस्तृत सूची तैयार की गई है। वर्तमान में इसमें 2,110 प्रकार की दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा 315 शल्य चिकित्सा सामग्री और आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध हैं।

यह उत्पाद सूची हृदय रोग, कैंसर रोधी और मधुमेह रोधी जैसी गंभीर बीमारियों को कवर करती है। साथ ही संक्रमण रोधी, एलर्जी रोधी और पाचन संबंधी दवाएं भी यहां उपलब्ध हैं। प्रयोगशाला अभिकर्मकों को छोड़कर लगभग सभी जेनेरिक दवाएं यहां मिलती हैं।

पुरानी बीमारियों के लिए विशेष फोकस

फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (PMBI) ने पुरानी बीमारियों पर विशेष ध्यान दिया है। गैर-संक्रामक रोगों (NCD) के रोगियों के लिए 850 से अधिक दवाएं संग्रह में शामिल हैं। यह मरीजों के लिए वरदान है।

टीबी की दवाओं के मामले में सरकार ने अलग रणनीति अपनाई है। 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय सभी पंजीकृत मरीजों को मुफ्त दवाएं प्रदान करता है। इसी कारण जन औषधि केंद्रों में टीबी रोधी दवाओं को शामिल नहीं किया गया है।

मजबूत आपूर्ति और आईटी प्रणाली

दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आधुनिक ढांचा तैयार किया है। देश भर में पांच बड़े गोदाम और 41 वितरकों का नेटवर्क काम कर रहा है। यह पूरी आपूर्ति श्रृंखला सूचना प्रौद्योगिकी (IT) से लैस है।

सितंबर 2024 से सरकार ने केंद्र संचालकों के लिए नए प्रोत्साहन की घोषणा की है। सबसे अधिक बिकने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने पर मासिक प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे केंद्रों पर दवाओं की कमी नहीं होती और संचालकों की आय बढ़ती है।

डिजिटल पूर्वानुमान और स्वचालन

खरीद प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल कदम उठाए गए हैं। PMBI द्वारा 400 तेजी से बिकने वाले उत्पादों की नियमित निगरानी की जाती है। मांग का निरंतर पूर्वानुमान लगाने के लिए पूर्वानुमान पद्धति को डिजिटल कर दिया गया है।

यह स्वचालन सुनिश्चित करता है कि मांग बढ़ने से पहले ही दवाओं का वितरण सुचारू कर दिया जाए। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में भी दवाओं की किल्लत नहीं होती। सरकार तकनीक के माध्यम से इस सेवा को दोषरहित बना रही है।

स्वरोजगार का सशक्त माध्यम

जन औषधि परियोजना केवल स्वास्थ्य सेवा ही नहीं, बल्कि स्वरोजगार का भी बड़ा जरिया है। सरकार ने मार्च 2027 तक केंद्रों की संख्या 25,000 करने का लक्ष्य रखा है। योजना के विस्तार के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया गया है।

इसमें व्यक्तिगत उद्यमी, गैर-सरकारी संगठन (NGO), समितियां और ट्रस्ट आवेदन कर सकते हैं। निजी कंपनियां और फर्में भी इस सेवा का हिस्सा बन सकती हैं। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया

जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदक के पास डी. फार्मा या बी. फार्मा की डिग्री होनी चाहिए। यदि आवेदक स्वयं योग्य नहीं है, तो वह किसी योग्य फार्मासिस्ट को नियुक्त कर सकता है। इसके बाद राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त करना होता है।

इच्छुक लोग वेबसाइट www.janaushadhi.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मध्यप्रदेश सहित देश के सभी जिलों के लिए आवेदन खुले हैं। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में यह जानकारी साझा की है।

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