राजस्थान

PM मोदी का पौधरोपण विवाद: PM मोदी: पीपल लगाया, खेजड़ी बताया? राजस्थान में विवाद

बलजीत सिंह शेखावत · 05 जुलाई 2026, 05:33 शाम
राजस्थान के पचपदरा में PM मोदी ने पीपल का पौधा लगाया, पर भाषण में उसे खेजड़ी बताया। इस चूक पर विपक्ष ने संस्कृति के ज्ञान को लेकर सवाल उठाए हैं, जिससे विवाद खड़ा हो गया है।

बालोतरा |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में थे। यहां उन्होंने ₹1.06 लाख करोड़ की विशाल विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

लेकिन, इस भव्य कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा किए गए एक पौधरोपण ने अब एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।

विवाद की जड़: पीपल को खेजड़ी बताना

इस विवाद की मुख्य वजह पौधे की गलत पहचान और दावों में विरोधाभास है। इस घटना ने मरुधरा की संवेदनशील पर्यावरण संस्कृति और स्थानीय भावनाओं को छू लिया है।

विपक्ष और स्थानीय पर्यावरणविदों का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम स्थल पर वास्तव में 'पीपल' का पौधा लगाया था।

हालांकि, उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और मुख्य भाषण में इसे राजस्थान का राज्य वृक्ष, यानी 'खेजड़ी' बता दिया गया।

इस मानवीय चूक के बाद से राजस्थान की राजनीति का पारा गरमा गया है।

सोशल मीडिया पर सामने आई सच्चाई

जब पचपदरा रिफाइनरी परिसर से प्रधानमंत्री मोदी के पौधरोपण की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आधिकारिक तौर पर पोस्ट किए गए, तो राजस्थान के स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने तुरंत इस पर ध्यान दिया।

वीडियो और तस्वीरों को करीब से देखने पर यह साफ हो गया कि रोपा गया पौधा 'पीपल' का है, न कि 'खेजड़ी' का।

प्रधानमंत्री के भाषण से बढ़ा भ्रम

विवाद तब और गहरा गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से दिए अपने मुख्य भाषण में स्पष्ट रूप से इस पौधरोपण का जिक्र किया।

आज मुझे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत खेजड़ी का पौधा लगाने का सौभाग्य मिला है... मैं जानता हूं राजस्थान में खेजड़ी का क्या महत्व है।

उनके इस बयान और तस्वीरों में दिख रहे पौधे के बीच का अंतर ही विवाद का केंद्र बन गया।

विपक्ष का तीखा हमला

इस मुद्दे को लेकर विरोधियों ने सरकार पर तीखे तंज कसे हैं। उन्होंने इसे संस्कृति और परंपराओं के ज्ञान की कमी से जोड़ा है।

संस्कृति के ज्ञान पर उठाए सवाल

आलोचकों ने लिखा कि जो लोग अपनी संस्कृति, मरुस्थल की परंपराओं और यहां पूजनीय माने जाने वाले पीपल व खेजड़ी जैसे पवित्र वृक्षों के बीच की बुनियादी पहचान तक नहीं कर पाते, वे देश और प्रदेश की संस्कृति की रक्षा करने के बड़े-बड़े दावे कैसे कर सकते हैं।

यह घटना अब राजस्थान में राजनीतिक चर्चा का एक प्रमुख विषय बन गई है, जहां खेजड़ी वृक्ष का गहरा सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व है।

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