नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण सहित तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर संसद में अपना पक्ष रखा। उन्होंने इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक मौका करार देते हुए कहा कि कुछ पल आने वाले समय की दिशा तय करते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' है और हमारी लोकतांत्रिक यात्रा अत्यंत समृद्ध रही है। उनके अनुसार, महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण फैसले देश में कई दशक पहले ही हो जाने चाहिए थे।
आधी आबादी की सक्रिय भागीदारी
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी को नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी मांग और जरूरत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह समय आ गया है जब महिलाएं सिर्फ मतदान तक सीमित न रहें। उन्हें निर्णय लेने वाली मेज पर पुरुषों के साथ बराबरी से बैठने का पूरा हक मिलना चाहिए।
राजनीति से ऊपर उठने की अपील
मोदी ने सभी सांसदों से इस विधेयक को राजनीतिक चश्मे से न देखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और संतुलित बनाने का एक ईमानदार प्रयास है।
उनके अनुसार, 'विकसित भारत' का अर्थ केवल आधुनिक बुनियादी ढांचा नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं को शासन में समान अधिकार और भागीदारी देना है।
जमीनी स्तर पर बदलाव
पुराने दिनों को याद करते हुए पीएम ने कहा कि पहले पंचायतों में आरक्षण देना आसान माना जाता था। लेकिन आज गांव-गांव की महिलाएं जागरूक हैं और सीधे निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहती हैं।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले इस बिल का विरोध करने वालों को जनता ने जवाब दिया है। इस बार माहौल सकारात्मक है क्योंकि कोई भी खुलकर विरोध करने का साहस नहीं कर रहा है।
क्रेडिट की चिंता न करें
पीएम ने चेतावनी दी कि जो लोग इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने नेताओं को अपनी नियत साफ रखने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की बात कही।
अंत में, उन्होंने विपक्ष को क्रेडिट का 'ब्लैंक चेक' देते हुए माहौल हल्का किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी को श्रेय चाहिए तो वह ले सकता है, बस इस ऐतिहासिक बिल को सर्वसम्मति से पास करें।