अबू धाबी | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक यात्रा पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंच गए हैं। अबू धाबी एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान खुद मौजूद रहे। यह स्वागत दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रिश्तों की एक नई मिसाल है।
आसमान में दिखा दोस्ती का अनूठा नजारा
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की शुरुआत ही बेहद खास रही। जैसे ही उनका विमान यूएई के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, वहां के वायुसेना के F-16 फाइटर जेट्स ने उन्हें एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया।
आसमान में फाइटर जेट्स द्वारा विमान को घेरना केवल एक सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं था। यह यूएई की ओर से भारत के प्रति दिखाए गए सर्वोच्च सम्मान और अटूट विश्वास का एक बड़ा प्रतीक था।
प्रधानमंत्री ने इस विशेष सम्मान के लिए राष्ट्रपति शेख मोहम्मद का आभार व्यक्त किया। उन्होंने राष्ट्रपति को अपना 'भाई' कहकर संबोधित किया। एयरपोर्ट पर औपचारिक स्वागत के बाद दोनों नेताओं के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति से मिलकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से वे फोन पर तो संपर्क में थे, लेकिन आमने-सामने मिलने की उत्सुकता बनी हुई थी।
आज की मुलाकात ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती दी है। विशेष रूप से रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत और यूएई अब पहले से कहीं अधिक निकटता से काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यूएई की सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई और आपसी सहयोग को बढ़ाने पर बल दिया।
क्षेत्रीय अशांति और हमलों पर भारत का रुख
यूएई पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के संदर्भ में भी एक बड़ा संदेश दिया। हाल के समय में अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव के बीच यूएई पर हुए हमलों पर भारत ने गहरी चिंता जताई।
प्रधानमंत्री ने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि निर्दोषों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने यूएई द्वारा इन मुश्किल हालात में दिखाए गए धैर्य की प्रशंसा की।
"भारत हर स्थिति में यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। शांति और स्थिरता जल्द बहाल करने के लिए भारत हर संभव मदद को तैयार है।"
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही अशांति का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। भारत हमेशा से ही युद्ध के बजाय कूटनीति और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने का पक्षधर रहा है।
भविष्य की रणनीतिक साझेदारी
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार समझौतों की प्रगति पर भी संतोष व्यक्त किया और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
निष्कर्षतः, पीएम मोदी की यह यात्रा न केवल कूटनीतिक रूप से सफल रही, बल्कि इसने वैश्विक मंच पर भारत और यूएई की अटूट दोस्ती का लोहा भी मनवाया है। यह साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
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