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जेजेएम घोटाला: सीएम ने 6 और अफसरों की जांच को दी मंजूरी, 18 पर ACB जांच

गणपत सिंह मांडोली · 09 दिसम्बर 2025, 06:43 सुबह
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) ने जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) घोटाले में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल (Subodh Agarwal) सहित छह अधिकारियों के खिलाफ एसीबी (ACB) जांच को मंजूरी दी है। पहले से 12 अधिकारियों पर जांच चल रही थी, अब कुल 18 अधिकारियों की जांच होगी।

जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) ने जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) घोटाले में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल (Subodh Agarwal) सहित छह अधिकारियों के खिलाफ एसीबी (ACB) जांच को मंजूरी दी है। पहले से 12 अधिकारियों पर जांच चल रही थी, अब कुल 18 अधिकारियों की जांच होगी।

राजस्थान में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यों के टेंडर में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोपों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित छह अधिकारियों के खिलाफ धारा 17-ए में एसीबी को जांच व अनुसंधान कार्रवाई की स्वीकृति दे दी है। यह कार्रवाई टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी टेक्निकल व वित्तीय मूल्यांकन समितियों में गड़बड़ी के जिम्मेदार चीफ इंजीनियर, अधीक्षण अभियंता व सचिव स्तर के अधिकारियों के खिलाफ की जाएगी।

एक अन्य मामले में, मुख्यमंत्री ने राजकीय दायित्वों के निर्वहन में गड़बड़ी करने के आरोपों में एक और आईएएस अधिकारी के खिलाफ नवीन जांच कार्रवाई को मंजूरी दी है। इसके अलावा, पांच अधिकारियों की रिव्यू याचिका खारिज करते हुए पहले का दंड यथावत रखा गया है, और सीसीए-नियम 16 के तहत दो सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी है।

छह अधिकारियों पर एसीबी जांच का शिकंजा

जिन छह अधिकारियों के खिलाफ एसीबी को जांच की अनुमति मिली है, उनमें तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (आईएएस) सुबोध अग्रवाल, डिप्टी सचिव (आरएएस) गोपाल सिंह शेखावत, चीफ इंजीनियर दलीप गौड़, फाइनेंस एडवाइजर व सीईओ केसी कुमावत, अधीक्षण अभियंता मुकेश गोयल और चीफ इंजीनियर केडी गुप्ता शामिल हैं। इनमें से दलीप गौड़ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन पर टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा और मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं।

पहले से 12 इंजीनियरों पर मुकदमे, फिर भी कार्रवाई नहीं

जल जीवन मिशन में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों से टेंडर देने के मामले में पहले ही 12 इंजीनियरों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में मुकदमा दर्ज हो चुका है। इन अधिकारियों में चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल, आरके मीणा, अधीक्षण अभियंता आरसी मीणा, एसीई पारितोष गुप्ता, निरिल कुमार, एसई विकास गुप्ता, भगवान सहाय जाजू, एक्सईएन जितेंद्र शर्मा, एफए सुशील शर्मा, एसीई अरुण श्रीवास्तव, एसई एमपी सोनी और एक्सईएन विशाल सक्सेना शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन पर मुकदमे दर्ज होने के बावजूद जलदाय विभाग ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

बल्कि, दागी इंजीनियरों पर कार्रवाई करने के बजाय कुछ को विभाग ने प्रमोशन दे दिया। जबकि पिछले दिनों एसीबी केस मामले में एक चीफ इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया था, जेजेएम घोटाले के आरोपी इंजीनियरों को निलंबित करने की फाइल को दबाया जा रहा था। यह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक संबंध और बड़ी गिरफ्तारियां

इस घोटाले में राजनीतिक कनेक्शन भी सामने आया है। जलदाय विभाग के तत्कालीन उप सचिव गोपाल सिंह शेखावत, जिन पर अब जांच की तलवार लटकी है, बानसूर के भाजपा विधायक देवी सिंह शेखावत के भाई हैं। जेजेएम मामले में उनका नाम उछलने के बाद सरकार ने उन्हें डिप्टी सीएम के एसएस पद से तत्काल हटा दिया था।

इस प्रकरण में ईडी, सीबीआई और एसीबी तीनों एजेंसियां जांच कर रही हैं। ईडी ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी, ठेकेदार पदमचंद जैन, महेश मित्तल, पीयूष जैन और संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया था। हालांकि, इन सभी को बाद में जमानत मिल चुकी है।

979 करोड़ का घोटाला: एक साल से दबाया जा रहा था मामला

जल जीवन मिशन का यह घोटाला 979 करोड़ रुपये का है। जलदाय विभाग की जांच रिपोर्ट में भी यह साबित हो गया था कि करोड़ों के इस घोटाले में इरकॉन के नाम पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाए गए थे। विभाग की कमेटी ने कुल 20 अधिकारियों को पूरे प्रकरण का जिम्मेदार माना था।

पहले 12 अधिकारियों के खिलाफ एसीबी ने जांच शुरू की थी, और अब मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद छह और अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू होगी। इस बड़े घोटाले में अब तक केवल एक एक्सईएन को निलंबित किया गया है। आरोप है कि दो अधिकारियों को फिलहाल बचाया जा रहा है। एक साल से इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन अब सरकार ने इस पर कार्रवाई की है।

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