राजनीति

मनरेगा से बापू का नाम हटाने पर ममता नाराज, बंगाल की योजना का नाम बदला

thinQ360 · 18 दिसम्बर 2025, 12:30 दोपहर
रोजगार गारंटी योजना मनरेगा (MNREGA) से महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का नाम हटाने के केंद्र सरकार (Central Government) के फैसले के बाद, पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्य की 'कर्मश्री' योजना (Karmashree Scheme) का नाम बदलकर 'महात्मा गांधी कर्मश्री' करने का ऐलान किया है। उन्होंने केंद्र के इस कदम को शर्मनाक बताया।

JAIPUR : रोजगार गारंटी योजना मनरेगा (MNREGA) से महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का नाम हटाने के केंद्र सरकार (Central Government) के फैसले के बाद, पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्य की 'कर्मश्री' योजना (Karmashree Scheme) का नाम बदलकर 'महात्मा गांधी कर्मश्री' करने का ऐलान किया है। उन्होंने केंद्र के इस कदम को शर्मनाक बताया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को एक बिजनेस और इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में यह घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अतुलनीय योगदान और सम्मान में लिया गया है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने का बिल लोकसभा से पास करा लिया है। इस नए बिल के तहत योजना का नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी 'VB-जी राम जी' होगा।

विपक्षी दल लगातार इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि महात्मा गांधी का नाम हटाना देश के इतिहास और मूल्यों का अपमान है।

केंद्र के फैसले पर ममता बनर्जी का कड़ा रुख

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को 'बेहद शर्मनाक' करार दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना से बापू का नाम हटाना अस्वीकार्य है और यह देश के लिए एक काला अध्याय है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार, पश्चिम बंगाल में, बेरोजगार लोगों को रोजगार देने के लिए पूरी तरह से गंभीर है। 'महात्मा गांधी कर्मश्री' योजना का नामकरण इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ममता की स्पीच के प्रमुख बिंदु

'कर्मश्री' योजना का महत्व

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2024 में 'कर्मश्री' योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक जॉब कार्ड धारक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 50 दिनों का मजदूरी रोजगार प्रदान करना है।

इस पहल से राज्य में बेरोजगारी दर कम करने और ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है। अब इसका नाम 'महात्मा गांधी कर्मश्री' योजना होने से इसकी पहचान और उद्देश्य को नई दिशा मिलेगी।

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अपने संसाधनों का उपयोग करके लोगों को काम देना जारी रखेगी, भले ही केंद्र से फंड की कमी हो। उन्होंने राज्य के समग्र विकास और शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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