कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर इथेनॉल सेक्टर में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इसी भ्रष्टाचार के कारण चीनी की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे आम जनता परेशान है।
इथेनॉल और चीनी की कीमतों पर बड़ा सवाल
ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से शुरू की गई ई-20 योजना को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। गाड़ियों की क्षमता और माइलेज पर उठ रहे सवालों के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में आर्थिक लाभ किसे हो रहा है?
इथेनॉल और चीनी के बढ़े दामों पर कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधा है।
'खा गई चीनी, पी गई तेल, देखो यह है बीजेपी का खेल'
खाचरियावास ने तंज कसते हुए कहा, 'खा गई चीनी, पी गई तेल, देखो यह है बीजेपी का खेल'। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जीडीपी खा गई और आम जनता रो रही है, जबकि बीजेपी हंस रही है।
उन्होंने कहा, "बीजेपी को शरम नहीं आती है, एक माह में चीनी के दामों में 25 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। क्योंकि इथेनॉल में भयंकर करप्शन हो रहा है।"
कांग्रेस नेता ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर भी निशाना साधते हुए कहा, "केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी दोनों हाथों से लूट रहे थे। आज कह रहे हैं कि मेरा इससे कुछ लेना नहीं है।"
'पूरी BJP ही भ्रष्ट है'
प्रताप सिंह खाचरियावास ने आगे कहा कि इथेनॉल सेक्टर में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के कारण ही एक महीने में चीनी की कीमतें 25 रुपए प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा, "इथेनॉल के मामले में पूरी BJP ही भ्रष्ट है। वे इससे पैसा कमा रहे हैं और अब उन्होंने चीनी के मामले में देश को बर्बाद कर दिया है। लोग चीनी के लिए परेशान हैं।"
चीनी मुद्दा बनेगा BJP के पतन का कारण
खाचरियावास ने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा, "लेकिन मेरी बात याद रखिएगा। जब भी चीनी की कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ी हैं, सरकारें गिरी हैं।"
उन्होंने कहा कि बीजेपी के पतन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और चीनी की बढ़ी हुई कीमतें ही बीजेपी के पतन का कारण बनेंगी।
सरकार का क्या है कहना?
मौजूदा समय में चीनी की कीमतें एक महीने में 25 फीसदी उछलकर 60 रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
हालांकि, सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में आई तेजी का एथेनॉल से कोई संबंध नहीं है। वहीं, बाजार के जानकार बताते हैं कि एथेनॉल की बढ़ती मांग का असर मक्का जैसी दूसरी फसलों और उनसे जुड़े खाद्य पदार्थों पर भी पड़ रहा है।
*Edit with Google AI Studio