नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। पंजाब की मान सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा कम किए जाने के बाद अब केंद्र ने उन्हें 'Z' श्रेणी की सुरक्षा दी है। यह सुरक्षा कवच देश के विशिष्ट राजनेताओं और हस्तियों को उनके खतरे के स्तर के आधार पर दिया जाता है। राघव चड्ढा की सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है।
क्या होती है Z श्रेणी की सुरक्षा?
Z लेवल की सुरक्षा का अर्थ है अत्यंत उच्च स्तर का सुरक्षा घेरा। इसमें कुल 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं, जो चौबीसों घंटे शिफ्ट में काम करते हैं। इस सुरक्षा दस्ते में 4 से 6 नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडो शामिल होते हैं। इसके अलावा सुरक्षा घेरे में एक बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहन भी मिलते हैं।
भारत में सुरक्षा की विभिन्न श्रेणियां
भारत में सुरक्षा को मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें Z+, Z, Y+, Y और X श्रेणियां शामिल हैं। खतरे के विश्लेषण के आधार पर इनका आवंटन होता है। Z+ सबसे ऊंची श्रेणी है जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी होते हैं। वहीं, Y+ श्रेणी में 11 और Y श्रेणी में 8 जवान तैनात रहते हैं। X श्रेणी में केवल 2 सशस्त्र पुलिस अधिकारी होते हैं।
सुरक्षा पर कितना होता है खर्च?
Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करना काफी खर्चीला होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस श्रेणी की सुरक्षा पर हर महीने करीब 15 से 20 लाख रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से राघव चड्ढा की सुरक्षा पर सालाना लगभग 2.40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह पूरा खर्च सरकार द्वारा सार्वजनिक कोष से वहन किया जाता है।
NSG कमांडो और उनकी महत्ता
Z और Z+ सुरक्षा श्रेणियों में 'ब्लैक कैट' कमांडो यानी NSG की तैनाती अनिवार्य होती है। ये जवान आतंकी खतरों और नजदीकी सुरक्षा प्रदान करने में दुनिया भर में माहिर माने जाते हैं। राघव चड्ढा को यह सुरक्षा उनके बढ़ते राजनीतिक कद और संभावित खतरों को देखते हुए दी गई है। अब उनके हर दौरे और प्रवास के दौरान यह अत्याधुनिक सुरक्षा दस्ता उनके साथ मौजूद रहेगा।