राजस्थान

NEET: भ्रष्ट सिस्टम ने ली जान?: NEET छात्रा की मौत, राहुल गांधी बोले- यह भ्रष्ट सिस्टम का नतीजा

desk · 04 जून 2026, 01:19 दोपहर
NEET परीक्षा विवाद के बीच छात्रा ने दी जान, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा, कहा- यह आत्महत्या नहीं।

नागपुर |

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में कथित धांधली और अनिश्चितता के बीच एक और दुखद खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश की रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने नागपुर में आत्महत्या कर ली। इस घटना पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस घटना को 'मोदी जी के भ्रष्ट और टूटे हुए सिस्टम का नतीजा' बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया गया है, जिसकी कीमत देश की युवा पीढ़ी चुका रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। राहुल ने कहा कि सरकार हर बार जांच और कमेटी की बात करती है, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं होता।

'यह आत्महत्या नहीं, भ्रष्ट सिस्टम की देन'

राहुल गांधी ने आकांक्षा के संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी। उसके पिता एक किसान हैं और उन्होंने बेटी के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था।

पिता बेटी की कोचिंग के लिए नागपुर में रसोइए का काम भी कर रहे थे। राहुल ने लिखा, "एक पिता ने अपनी तरफ से सब कुछ किया, लेकिन NEET पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता ने एक होनहार छात्रा की जिंदगी छीन ली।"

आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं, मोदी जी की एक भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था की देन है।

पिता ने कर्ज लेकर पढ़ाया, बेटी ने तोड़ा दम

आकांक्षा मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली थी। वह नागपुर में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। परिवार के मुताबिक, परीक्षा के बाद वह बहुत खुश थी और उसे 650 से ज्यादा अंक आने की उम्मीद थी।

लेकिन जैसे ही पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें आईं, वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई। उसने खाना-पीना और लोगों से बात करना कम कर दिया था।

सुसाइड नोट में छलका दर्द

20 मई को आकांक्षा का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी थी।

नोट में उसने लिखा था कि अब उसमें दोबारा NEET परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और गुस्से की लहर दौड़ा दी है।

यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के छात्रों पर पड़ने वाले गंभीर मानसिक प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सरकार की निष्क्रियता से न केवल एक परिवार का सपना टूटा है, बल्कि देश के भविष्य को भी नुकसान हो रहा है।

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