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राजस्थान में ₹10,000 करोड़ का रेल प्रोजेक्ट: राजस्थान में ₹10,000 करोड़ से बिछेगी 827 किमी लंबी नई रेल लाइन, भारत-पाक सीमा तक पहुंचेगी ट्रेन

मानवेन्द्र जैतावत · 13 अप्रैल 2026, 01:59 दोपहर
राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 827 किमी लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। 10 हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से सामरिक सुरक्षा और स्थानीय विकास को बड़ी मजबूती मिलेगी।

जयपुर | राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में रेल कनेक्टिविटी को एक नई दिशा मिलने वाली है। केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय ने पाकिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों में 827 किलोमीटर लंबा नया रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना पर काम तेज कर दिया है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल स्थानीय लोगों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि देश की सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कॉरिडोर

सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल लाइन बिछने से भारतीय सेना की आवाजाही पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज और सुगम हो जाएगी। आपातकालीन स्थितियों में जवानों और भारी सैन्य साजो-सामान को सीमा तक पहुंचाना अब मिनटों का काम होगा।

अभी तक इन इलाकों में परिवहन के लिए मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर ही निर्भर रहना पड़ता था। रेल नेटवर्क के विस्तार से रणनीतिक बढ़त मिलेगी और सीमा पर निगरानी तंत्र को भी मजबूती प्राप्त होगी।

परियोजना का विस्तृत रूट मैप

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस कॉरिडोर के तहत कई महत्वपूर्ण खंडों पर काम किया जा रहा है। इसमें जैसलमेर से भीलड़ी (बाड़मेर के रास्ते) तक लगभग 380 किलोमीटर लंबी लाइन शामिल है।

इसके अलावा जैसलमेर से खाजूवाला के बीच 260 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे का काम तेजी से चल रहा है। इन रूटों के जुड़ने से पश्चिमी राजस्थान का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा।

बीकानेर-अनूपगढ़ लाइन की डीपीआर तैयार

परियोजना के एक अहम हिस्से, अनूपगढ़ से बीकानेर के बीच 187 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पूरी हो चुकी है। इस खंड पर करीब 2277 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

जैसे ही इस प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी मिलेगी, निर्माण कार्य धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा। इससे बीकानेर और अनूपगढ़ के बीच की दूरी कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

जैसलमेर और खाजूवाला के बीच होने वाला सर्वे यह तय करेगा कि पटरी किन-किन गांवों से होकर गुजरेगी। इसमें पर्यावरण और भौगोलिक परिस्थितियों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। रेलवे की इंजीनियरिंग टीम अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है।

स्थानीय विकास और रोजगार के अवसर

यह रेल कॉरिडोर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमावर्ती गांवों के विकास के द्वार भी खोलेगा। अब तक जो गांव मुख्यधारा से कटे हुए थे, उन्हें सीधे रेल सेवा से जोड़ा जाएगा।

इससे स्थानीय कृषि उत्पादों, विशेषकर अनाज और फलों की ढुलाई आसान होगी। किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में कम समय और कम खर्च लगेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

रेगिस्तानी इलाकों में रोजगार की कमी एक बड़ी समस्या रही है। नई रेल लाइन बिछने से स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के हजारों नए अवसर प्राप्त होंगे।

स्टेशनों का आधुनिक कायाकल्प

रेलवे इस प्रोजेक्ट के साथ-साथ मौजूदा स्टेशनों को भी अपग्रेड कर रहा है। अनूपगढ़, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, सूरतगढ़ और श्रीगंगानगर स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इन सीमावर्ती स्टेशनों पर वेटिंग हॉल, वाई-फाई, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। बाड़मेर और जैसलमेर जैसे स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य लगभग पूरा हो चुका है।

पश्चिमी राजस्थान में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से जैसलमेर और बाड़मेर आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। इससे होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को लाभ मिलेगा।

उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ अमित सुदर्शन के अनुसार, ये प्रोजेक्ट्स सीमावर्ती जिलों के सर्वांगीण विकास को नई गति देंगे। रेलवे का लक्ष्य है कि सरहद के अंतिम छोर तक विकास की लहर पहुंचे।

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