राजस्थान

300 स्कूल होंगे हिंदी मीडियम: 300 महात्मा गांधी स्कूल बनेंगे हिंदी मीडियम, फैसले पर सियासत

desk · 05 जुलाई 2026, 01:03 दोपहर
राजस्थान सरकार कम नामांकन वाले 300 महात्मा गांधी स्कूलों को हिंदी माध्यम में भी चलाएगी। इस फैसले को सियासी वार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि सबसे ज्यादा स्कूलें पीसीसी चीफ के क्षेत्र की हैं।

Rajasthan | राजस्थान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। प्रदेश के कम नामांकन वाले 300 महात्मा गांधी स्कूलों को अब हिंदी माध्यम में भी संचालित किया जाएगा। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय ने एक सूची जारी की है और जिला शिक्षा विभागों से रिपोर्ट तलब की है।

महात्मा गांधी स्कूल अब हिंदी माध्यम में भी

शिक्षा विभाग के इस फैसले के बाद, कम छात्र संख्या वाले 300 महात्मा गांधी स्कूलों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी माध्यम की पढ़ाई भी होगी।

निदेशालय ने इन स्कूलों की ब्लॉकवार सूची जारी की है, जिसमें नामांकन और शिक्षकों की संख्या का भी उल्लेख है। संबंधित जिला शिक्षा विभागों को इस पर सात दिनों के भीतर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है।

सियासी गलियारों में हलचल

सरकार के इस कदम को एक नवाचार के साथ-साथ एक सियासी दांव के रूप में भी देखा जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि इन 300 स्कूलों में से सबसे ज्यादा 20 स्कूलें पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में स्थित हैं।

गौरतलब है कि डोटासरा ने अपने शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में सबसे अधिक महात्मा गांधी स्कूलें खोली थीं।

शिक्षा मंत्री दिलावर का तीखा हमला

राज्य में सरकार बदलने के बाद से ही शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, पीसीसी चीफ डोटासरा पर हमलावर रहे हैं। उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों से महात्मा गांधी स्कूलों को बंद करने की बात कही है।

दिलावर ने इन स्कूलों को 'थर्ड क्लास' और 'भांग खाकर खोले गए स्कूल' तक कह डाला था। उन्होंने इन स्कूलों की समीक्षा कर इन्हें बंद करने की भी घोषणा की थी। ऐसे में लक्ष्मणगढ़ के स्कूलों में हिंदी माध्यम शुरू करने को उनके सियासी हमले के तौर पर देखा जा रहा है।

कब और कैसे खुले थे ये स्कूल?

राजस्थान में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की शुरुआत साल 2019-20 में हुई थी। प्रारंभ में, ये स्कूल केवल जिला मुख्यालयों पर खोले गए थे।

इसके बाद, 2021 में जब गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री थे, तब इन स्कूलों का विस्तार पांच हजार की आबादी वाले गांवों और कस्बों तक कर दिया गया था।

क्या बंद हो जाएगा अंग्रेजी माध्यम?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्कूलों में हिंदी माध्यम शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदी माध्यम में नामांकन बढ़ने की संभावना है।

इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में इन स्कूलों से अंग्रेजी माध्यम को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए और उन्हें फिर से सामान्य हिंदी माध्यम स्कूलों में बदल दिया जाए।

सीकर जिले पर विशेष ध्यान

जारी की गई सूची के अनुसार, जिन 300 स्कूलों में नामांकन कम पाया गया है, उनमें सबसे अधिक 45 स्कूलें सीकर जिले की हैं।

इनमें भी, सबसे ज्यादा 20 स्कूलें अकेले लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र की हैं, जो इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है। हालांकि, विभाग का तर्क है कि स्कूलों का चयन पूरी तरह से कम नामांकन के आधार पर निष्पक्ष रूप से किया गया है।

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