जयपुर | राजस्थान एटीएस ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के एक बड़े और चौंकाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। चीन में निर्मित सिंथेटिक ड्रग्स अब नेपाल के रास्ते भारत के विभिन्न शहरों में पहुंचाई जा रही है।
एटीएस की टीम ने भारत-नेपाल सीमा पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो तस्करों को रंगे हाथों पकड़ा है। उनके कब्जे से लगभग 1 करोड़ रुपये मूल्य की 2.065 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडी) बरामद की गई।
एडीजी दिनेश एमएन ने बताया कि यह ऑपरेशन खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया था। गिरफ्तार तस्करों की पहचान खेमकुमार मंगोलियन और अजय राना के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नेपाल के निवासी हैं।
चीन से नेपाल और फिर जयपुर का नया रूट
पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस तस्करी के तार सीधे चीन से जुड़े हैं। चीन में सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जाती है और फिर उसे नेपाल के रास्ते भारत लाया जाता है।
यह ड्रग्स नेपाल से दिल्ली पहुंचती है और वहां से इसे जयपुर सहित देश के कई बड़े शहरों में सप्लाई किया जाता है। तस्करों ने इस बार जयपुर को अपना मुख्य ट्रांजिट पॉइंट बनाया था।
गिरफ्तार आरोपी खेमकुमार मंगोलियन नेपाल के रूपनदेही का रहने वाला है। वहीं, दूसरा आरोपी अजय राना पाल्पा, नेपाल का निवासी है। ये दोनों लंबे समय से इस काले कारोबार में शामिल थे।
तस्करों का पुराना रिकॉर्ड और नेटवर्क
एटीएस की जांच में सामने आया कि ये तस्कर पहले भी छह बार दिल्ली में ड्रग्स की बड़ी खेप पहुंचा चुके हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद छोटे कैरियर के जरिए माल अन्य राज्यों में भेजा जाता था।
इस नेटवर्क में कई स्थानीय गुर्गे भी शामिल हैं जो माल की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। पुलिस अब उन छोटे एजेंटों की तलाश कर रही है जो जयपुर में इस खेप का इंतजार कर रहे थे।
पंजाब बॉर्डर की जगह नेपाल बना तस्करों की पसंद
एडीजी दिनेश एमएन के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के कारण अब तस्करों ने अपना रास्ता बदल लिया है। पंजाब-पाकिस्तान सीमा पर निगरानी बढ़ने से उन्होंने नेपाल रूट को चुना है।
तस्करों का मानना है कि नेपाल बॉर्डर पर आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है, जिससे पकड़े जाने का खतरा कम रहता है। यही कारण है कि इस मार्ग से ड्रग्स की एंट्री लगातार बढ़ रही है।
अधिकारियों ने बताया कि नेपाल अब ड्रग्स तस्करी के लिए एक नया और असुरक्षित कॉरिडोर बनता जा रहा है। तस्कर छोटी खेप में माल लाकर सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने की कोशिश करते हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र तक फैला है जाल
यह सिंडिकेट केवल राजस्थान या दिल्ली तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आया है कि चीन की यह सिंथेटिक ड्रग्स गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी सप्लाई की जा रही थी।
इन राज्यों में एमडी ड्रग्स की भारी मांग है, जिसका फायदा यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह उठा रहा है। विशेष रूप से पर्यटन स्थलों और बड़े शहरों की पार्टियों में इस ड्रग्स की खपत अधिक होती है।
तस्कर अब पंजाब-पाकिस्तान बॉर्डर की बजाय नेपाल रूट को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। इसी कारण इस मार्ग से सिंथेटिक ड्रग्स की एंट्री बढ़ रही है।
एटीएस की अगली कार्रवाई और स्थानीय कनेक्शन
एसपी ज्ञानचंद यादव की टीम अब इस पूरे नेटवर्क के स्थानीय कनेक्शन खंगाल रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि जयपुर में इस ड्रग्स को कौन रिसीव करने वाला था।
एटीएस इंस्पेक्टर निशा चावरिया और कांस्टेबल अब्दुल मजीद को इस तस्करी के बारे में सबसे पहले पुख्ता जानकारी मिली थी। इसके बाद ही बॉर्डर पर घेराबंदी कर इन तस्करों को दबोचा गया।
जांच का एक मुख्य पहलू इस तस्करी की फंडिंग से भी जुड़ा है। पुलिस उन फाइनेंसरों की पहचान कर रही है जो इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को पैसा मुहैया करा रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती
दिल्ली से नजदीकी होने के कारण जयपुर अब ड्रग्स के लिए एक बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट बनता जा रहा है। यहां से माल को आसानी से उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में भेजा जा सकता है।
एटीएस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, चीन और नेपाल के बीच फैले इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना बड़ी चुनौती है।
यह कार्रवाई भारत की आंतरिक सुरक्षा और युवाओं को नशे के जाल से बचाने की दिशा में एक बड़ी जीत है। पुलिस आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां कर सकती है।
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