जयपुर | राजस्थान सरकार प्रदेश में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के सपने को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना को और अधिक प्रभावी बनाने जा रही है। मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के माध्यम से प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत किया जाए। इसके साथ ही विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाकर आमजन को रोगों से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाए जाएंगे।
आयुष्मान आरोग्य योजना: 25 लाख का सुरक्षा कवच
मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत महत्वाकांक्षी एवं विजनरी योजना है। इस योजना के माध्यम से वर्तमान में प्रदेश के करीब 1.36 करोड़ परिवारों को 25 लाख रूपए तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है। यह देशभर में अपनी तरह की एक अनूठी योजना है, जिसमें सामान्य रोगों से लेकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट तक के जटिल रोगों का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार इस सुविधा से वंचित न रहे और उसे समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए इंश्योरेंस कम्पनियों के साथ समन्वय को और बेहतर बनाया जाए। इससे रोगियों को अस्पतालों में उपचार लेने में और अधिक सुगमता होगी और उन्हें किसी भी प्रकार की कागजी बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बीमा कंपनियों के साथ बेहतर समन्वय और क्लेम निपटारा
बैठक में यह बात सामने आई कि बड़ी संख्या में रोगी निजी अस्पतालों के बजाय राजकीय चिकित्सा संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, विभिन्न तकनीकी कारणों से राजकीय अस्पतालों में क्लेम रिजेक्शन की दर अधिक रहती है, जिसे न्यूनतम स्तर पर लाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर क्लेम संबंधी समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया जाए। इसके लिए बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित की जाएं ताकि लंबित प्रकरणों को जल्द सुलझाया जा सके। उन्होंने योजना को और सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों यानी बेस्ट प्रैक्टिसेज को अपनाने के निर्देश दिए। इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी और बेहतर तरीके से हो सकेगी।
PM-ABHIM: आधारभूत ढांचे की मजबूती और निगरानी
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों की गुणवत्ता एवं उनकी समुचित उपयोगिता हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। निर्माण कार्यों के दौरान प्रभावी पर्यवेक्षण, नियमित मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध पूर्णता पर विशेष ध्यान दिया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि दूर-दराज के क्षेत्रों में भी लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, जिसके लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त स्टाफ और बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी और मरीजों को बड़े शहरों की ओर भागना नहीं पड़ेगा।
टीबी मुक्त राजस्थान: अर्ली डायग्नोसिस पर फोकस
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में बेहतर कार्य हो रहा है, लेकिन हमें इसे और गति देनी होगी। हमारा लक्ष्य टीबी से होने वाली मृत्यु दर को घटाकर 1 प्रतिशत तक लाना है। इसके लिए 'अर्ली डायग्नोसिस' यानी बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगाने पर विशेष जोर दिया जाए। जितना जल्दी उपचार शुरू होगा, मरीज के स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी।
जनजागरूकता और आईईसी गतिविधियों का महत्व
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि टीबी मुक्त राजस्थान अभियान को सफल बनाने के लिए आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियों को बढ़ाया जाए। आमजन को टीबी के लक्षणों और इसके मुफ्त इलाज के बारे में जागरूक करना इस मिशन की सफलता के लिए अनिवार्य है। अभियान के अंतर्गत वितरित किए जाने वाले पोषण किट की व्यवस्था को भी और सुधारा जा रहा है। मरीजों को उचित पोषण मिले, इसके लिए सरकार हर संभव सहायता प्रदान कर रही है, ताकि वे जल्द से जल्द बीमारी से उबर सकें।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण हमारी प्राथमिकता है, जिससे हर नागरिक को बिना किसी आर्थिक बोझ के श्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सके।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि आयुष्मान योजना का दायरा पिछली बीमा योजनाओं की तुलना में काफी बढ़ा है। अब इसमें पहले से अधिक पैकेज और अस्पतालों का एक विशाल नेटवर्क नागरिकों के लिए उपलब्ध है।
रिकॉर्ड बजट व्यय और मरीजों का बढ़ता भरोसा
इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी के माध्यम से अब राजस्थान के नागरिक देश के 30 हजार से अधिक अस्पतालों में उपचार ले सकते हैं। मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि पीएम-अभीम के तहत आवंटित राशि का रिकॉर्ड 94 प्रतिशत व्यय किया गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 19.38 लाख मरीजों को 3888 करोड़ रूपए का कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया है। इसके अलावा, प्रदेश की 6547 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है, जिसके लिए राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया है। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि राजस्थान स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मॉडल स्टेट बनने की ओर अग्रसर है। सरकार की इन योजनाओं का सीधा लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंच रहा है, जिससे सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का ढांचा और मजबूत हुआ है।
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