राजस्थान | राजस्थान बैडमिंटन एसोसिएशन (RBA) के खिलाफ खिलाड़ियों और अभिभावकों ने सरकार से शिकायत की है। उन्होंने एसोसिएशन की मौजूदा कार्यकारिणी को भंग करने, वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और एक नई एडहॉक कमेटी बनाने की मांग उठाई है। यह विवाद एसोसिएशन के कामकाज में पारदर्शिता की कमी को लेकर खड़ा हुआ है।
बैडमिंटन में भ्रष्टाचार?: राजस्थान बैडमिंटन एसोसिएशन में भ्रष्टाचार के आरोप
राजस्थान बैडमिंटन एसोसिएशन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। खिलाड़ियों ने सरकार से जांच और कार्यकारिणी भंग करने की मांग की है।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान बैडमिंटन एसोसिएशन (RBA) पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के गंभीर आरोप लगे हैं।
- खिलाड़ियों और अभिभावकों ने सरकार से मौजूदा कार्यकारिणी को भंग करने की मांग की है।
- एसोसिएशन के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई गई है।
- शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।
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RBA पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
राजस्थान बैडमिंटन एसोसिएशन (RBA) के कामकाज को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। खिलाड़ियों, उनके अभिभावकों और बैडमिंटन समुदाय से जुड़े लोगों ने सरकार को शिकायत भेजकर एसोसिएशन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि एसोसिएशन का संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है। इसी आधार पर मौजूदा कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की गई है।
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25 साल से एक ही नेतृत्व पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, 30 जुलाई और 3 अगस्त को सरकार को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में शिकायत भेजी गई थी। इस शिकायत पर महेंद्र चौधरी, सीए मगन सिंह और एडवोकेट बीएल धाकड़ के हस्ताक्षर हैं।
शिकायतकर्ताओं ने खुद को खिलाड़ियों, अभिभावकों और बैडमिंटन समुदाय का प्रतिनिधि बताया है। उनका मुख्य आरोप यह है कि पिछले लगभग 25 सालों से एसोसिएशन का नेतृत्व एक ही व्यक्ति के हाथ में है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
चयन प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि खिलाड़ियों के चयन, प्रतियोगिताओं के आयोजन और निजी बैडमिंटन अकादमियों को अनुमति देने जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता की भारी कमी है।
एसोसिएशन पर कुछ विशेष लोगों को फायदा पहुंचाने, चयन प्रक्रिया में पक्षपात करने और रिश्तेदारी को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का मानना है कि इस व्यवस्था के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का समान अवसर नहीं मिल पा रहा है।
वित्तीय अनियमितताओं पर भी उठे सवाल
शिकायत में एसोसिएशन के वित्तीय प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इसमें सरकारी अनुदान, स्पॉन्सरशिप और खिलाड़ियों से ली जाने वाली फीस के उपयोग में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है।
फीस और स्पॉन्सरशिप का हिसाब मांगा
हाल ही में आयोजित हुए राज्य स्तरीय रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट का उदाहरण देते हुए शिकायत में कहा गया है कि खिलाड़ियों से एंट्री फीस के रूप में लाखों रुपये वसूले गए, लेकिन सुविधाओं पर उतना खर्च नहीं किया गया।
यह भी दावा किया गया है कि टूर्नामेंट में इस्तेमाल होने वाली महंगी शटलकॉक स्पॉन्सरशिप के माध्यम से मिली थीं। इसके बावजूद, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इकट्ठा हुए पैसे कहां और कैसे खर्च किए गए। इसी वजह से सरकारी अनुदान, BAI से मिली सहायता और स्पॉन्सरशिप से प्राप्त राशि की स्वतंत्र ऑडिट की मांग की गई है।
सरकार से जांच और नई कमेटी की मांग
शिकायत में एसोसिएशन के सचिव से जुड़े एक हालिया पुलिस मामले का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस मामले में लगे आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही एसोसिएशन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई है।
कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
शिकायतकर्ताओं ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि मौजूदा कार्यकारिणी को भंग कर एक नई एडहॉक कमेटी का गठन किया जाए।
इसके साथ ही, एसोसिएशन के वित्तीय मामलों, सरकारी अनुदान के उपयोग, खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया और संपूर्ण कामकाज की एक निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले में जल्द कोई कार्रवाई नहीं की तो खिलाड़ी, अभिभावक और बैडमिंटन समुदाय के लोग मिलकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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