राजस्थान

राजस्थान बार काउंसिल: महिला शक्ति का उदय: राजस्थान बार काउंसिल चुनाव 22 अप्रैल को: 5 आरक्षित सीटों के लिए 57 महिला प्रत्याशियों में कड़ा मुकाबला

मानवेन्द्र जैतावत · 10 अप्रैल 2026, 09:55 सुबह
राजस्थान बार काउंसिल के 23 पदों के लिए 22 अप्रैल को मतदान होगा। इस बार 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने से चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

जयपुर | राजस्थान बार काउंसिल के आगामी चुनाव इस बार ऐतिहासिक और बेहद रोचक होने जा रहे हैं। 22 अप्रैल को होने वाले मतदान में प्रदेश की महिला वकील अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगी। राज्य बार काउंसिल के कुल 23 निर्वाचित सदस्यों के चुनाव के लिए रणभेरी बज चुकी है। इस बार के चुनाव में सबसे खास बात महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण है, जिसने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें और कड़ा मुकाबला

काउंसिल के 23 सदस्यों में से 5 पद पहली बार महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इन 5 आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए कुल 57 महिला प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोक रही हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो हर महिला प्रत्याशी का मुकाबला औसतन 11 अन्य महिला उम्मीदवारों से है। महिला वकीलों के बीच इस बार चुनाव को लेकर अभूतपूर्व उत्साह और सक्रियता देखी जा रही है। प्रचार-प्रसार के मामले में भी महिला प्रत्याशी किसी से पीछे नहीं हैं। वे कचहरियों में जाकर साथी वकीलों से समर्थन मांग रही हैं और बार काउंसिल में सुधार के बड़े वादे कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में चुनाव

इस बार के चुनाव की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में संपन्न हो रही है। यह कदम चुनाव में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। देशभर के बार काउंसिल चुनावों की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया कर रहे हैं। राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष निगरानी समितियां गठित की गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जे आर मिड्ढा की तीन सदस्यीय कमेटी को राजस्थान में चुनाव कराने का जिम्मा दिया गया है। राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मनोज गर्ग को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है।

मतदान केंद्रों की व्यवस्था और सुरक्षा

मतदान प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए पूरे प्रदेश में 239 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन आचार्य को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हर मतदान केंद्र पर स्थानीय उपखंड अधिकारी (SDO) ऑब्जर्वर की भूमिका में रहेंगे। उनके साथ जिला प्रशासन और हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त कर्मचारी भी पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखेंगे। स्थानीय बार एसोसिएशनों से पोलिंग अधिकारियों और सहायकों के नाम मांगे गए हैं। मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की गई है।

महिला वकीलों का बदलता परिदृश्य

राजस्थान बार काउंसिल के इतिहास में अब तक केवल दो महिला सदस्य ही निर्वाचित हो पाई हैं। इनमें कमला जैन और सुनीता सत्यार्थी के नाम शामिल हैं, जिन्होंने दशकों पहले यह उपलब्धि हासिल की थी। पूर्व सदस्य सुनीता सत्यार्थी के अनुसार, 1993 में जब वे चुनी गई थीं, तब राज्य में केवल 1200 महिला वकील थीं। आज यह संख्या कई गुना बढ़कर 22 हजार के पार पहुंच गई है।

चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े

कुल 25 पदों वाली बार काउंसिल में 23 पर चुनाव होंगे, जबकि 2 पदों पर महिलाओं को मनोनीत किया जाएगा। यह कदम कानूनी क्षेत्र में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा। इस चुनाव के परिणाम राजस्थान के कानूनी जगत की नई दिशा तय करेंगे। महिला वकीलों की बढ़ती भागीदारी से उम्मीद है कि बार काउंसिल की कार्यप्रणाली में नया और समावेशी दृष्टिकोण देखने को मिलेगा।

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