जयपुर | राजस्थान सरकार अब प्रदेश में बिजली की किल्लत को स्थाई रूप से दूर करने के लिए सौर ऊर्जा को स्टोर करने की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। इसके लिए डिस्कॉम्स बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित करेंगे।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने हाल ही में विद्युत भवन में बिजली वितरण निगमों की समीक्षा बैठक के दौरान इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से गति देने के कड़े निर्देश दिए हैं।
इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य उन विशिष्ट क्षेत्रों में बैटरी ऊर्जा भंडार प्रणाली लगाना है, जहां पीएम कुसुम योजना और रूफ टॉप सौर संयंत्रों से प्रचुर मात्रा में विकेन्द्रित सौर ऊर्जा उत्पन्न हो रही है।
इससे सुबह और शाम के पीक ऑवर्स के दौरान बिजली की सप्लाई को मेंटेन करने में बड़ी मदद मिलेगी। यह कदम राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
सौर ऊर्जा का होगा बेहतर इस्तेमाल
शासन सचिव ऊर्जा एवं चेयरमैन डिस्कॉम्स आरती डोगरा ने बैठक में बताया कि जयपुर, जोधपुर एवं अजमेर विद्युत वितरण निगम द्वारा उत्पादित विकेन्द्रित सौर ऊर्जा का भरपूर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्टोरेज सिस्टम लगेंगे।
इन स्टैंडअलोन डिसेन्ट्रलाइज बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के माध्यम से दिन में बनने वाली अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखा जा सकेगा, जिसे जरूरत पड़ने पर ग्रिड में वापस छोड़कर आपूर्ति सुचारू रखी जाएगी।
बैठक में ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सौर ऊर्जा का भंडारण न केवल बिजली आपूर्ति में सुधार करेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बिना किसी ट्रिपिंग के निर्बाध बिजली प्रदान करने में भी सहायक होगा।
"राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्टोरेज क्षमता का विस्तार आवश्यक है। इससे विद्युत आपूर्ति को बेहतर किया जा सकेगा और हम भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों के लिए तैयार रहेंगे।"
स्मार्ट मीटरिंग और तकनीकी सुधार
ऊर्जा मंत्री ने स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट की प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत सरकार की आरडीएसएस योजना के अन्तर्गत स्मार्ट मीटरिंग से उपभोक्ताओं को अब बिल्कुल सटीक बिलिंग की सुविधा मिल रही है।
प्रदेश में अब तक 37.81 लाख उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इससे न केवल बिजली वितरण में पारदर्शिता आई है, बल्कि उपभोक्ताओं की बिल संबंधी पुरानी शिकायतों में भी भारी कमी आई है।
बिजली छीजत पर लगाम
बिजली छीजत यानी लॉसेस को कम करने के लिए मंत्री ने अधिकारियों को और अधिक प्रभावी कदम उठाने पर बल दिया। जिन क्षेत्रों में तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान अधिक हैं, वहां सघन निगरानी की जाएगी।
बताया गया कि आरडीएसएस योजना में लॉस रिडक्शन के तहत 33 केवी के 179 नए जीएसएस बनाए गए हैं। जिससे संबद्ध क्षेत्रों में वोल्टेज की समस्या दूर हुई है और बिजली की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
इसी तरह ट्रिपिंग कम करने तथा लोड बैलेसिंग के लिए 60 प्रतिशत फीडरों का विभाजन किया गया है। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति पहले से बेहतर हुई है।
अंततः, बैटरी स्टोरेज और स्मार्ट मीटरिंग जैसे तकनीकी नवाचार राजस्थान के बिजली ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करेंगे। इससे न केवल सरकारी डिस्कॉम्स का घाटा कम होगा, बल्कि आम जनता को भी सस्ती बिजली मिलेगी।
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