बीकानेर | राजस्थान के बीकानेर में हुए एक सड़क हादसे ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के एक बहुत बड़े और खतरनाक नेटवर्क का सनसनीखेज पर्दाफाश कर दिया है।
पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए जयपुर से कैटरिंग का काम करने वाले दो संदिग्धों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
इस पूरे तस्करी गिरोह का मास्टरमाइंड पाली निवासी राकेश प्रजापत बताया जा रहा है, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और फरार चल रहा है।
पुलिस ने राकेश की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपए का नकद इनाम घोषित किया है और उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
यह पूरा मामला 22 अप्रैल को बीकानेर के पूगल रोड पर हुई एक दुर्घटना के बाद सामने आया, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं।
पूगल रोड पर एक स्कूटी सवार युवक खेताराम मेघवाल अचानक सड़क पर आई नीलगाय से टकराकर बुरी तरह घायल हो गया था और सड़क पर गिर पड़ा।
जब स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घायल की स्कूटी की जांच की, तो उसमें से 14 किलो उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन बरामद की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद की गई इस हेरोइन की कीमत करीब 70 करोड़ रुपए आंकी गई है, जो इस साल की बड़ी बरामदगी में से एक है।
घायल खेताराम फिलहाल पीबीएम अस्पताल में भर्ती है, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण वह अभी तक पुलिस को अपना बयान देने की स्थिति में नहीं है।
जेल से जुड़ा तस्करी का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस पूरे काले कारोबार की पटकथा पंजाब की जेल के भीतर बैठकर लिखी गई थी।
मुख्य आरोपी राकेश प्रजापत पूर्व में पंजाब की जेल में बंद था, जहां उसकी मुलाकात पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के गुर्गों से हुई थी।
जेल से बाहर आने के बाद राकेश ने उन संपर्कों का इस्तेमाल कर राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के जरिए नशे की तस्करी का अपना जाल फैलाया।
राकेश के खिलाफ पहले से ही पाली में डकैती और चोरी के सात मामले दर्ज हैं, जबकि पंजाब में भी उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज पाए गए हैं।
पुलिस को अंदेशा है कि यह नेटवर्क पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाली ड्रग्स की खेप को पंजाब, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में सप्लाई करता था।
जयपुर के दो आरोपी और उनकी भूमिका
पुलिस ने जयपुर से राहुल रावत और प्रशांत कयाल को गिरफ्तार किया है, जो इस गिरोह में डिलीवरी मैन के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
पूछताछ में पता चला है कि ये दोनों आरोपी राकेश के इशारे पर बॉर्डर से हेरोइन की खेप उठाते थे और उसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते थे।
आरोपियों ने कबूल किया है कि वे पहले भी पाकिस्तानी सीमा से ड्रोन द्वारा गिराई गई नशीले पदार्थों की खेप को आगे पहुंचाने का काम कर चुके हैं।
तस्करों ने बीकानेर के एक स्थानीय व्यक्ति की स्कूटी का इस्तेमाल किया था ताकि पुलिस या किसी अन्य को उन पर जरा भी शक न हो सके।
पुलिस अब उन स्थानीय मददगारों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इन तस्करों को रहने के लिए जगह और वाहन जैसे लॉजिस्टिक सपोर्ट दिए थे।
विस्तारित जांच और एसपी का बयान
बीकानेर एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया कि पुलिस की टीमें इस नेटवर्क की गहराई तक जाने के लिए दिल्ली और बेंगलुरु में भी जांच कर रही हैं।
एसपी के मुताबिक, इस मामले में कुछ और संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है जिनसे गहनता से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह का जड़ से सफाया हो।
70 करोड़ रुपए की हेरोइन बरामदगी मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। अस्पताल में भर्ती खेताराम से अभी पूछताछ नहीं हो सकी है। जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। - एसपी मृदुल कच्छावा
पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह ने पिछले कुछ महीनों में करोड़ों रुपए की ड्रग्स भारतीय सीमा के भीतर खपाई है, जिसकी जांच जारी है।
सीमा सुरक्षा बल और पुलिस अब संयुक्त रूप से बॉर्डर इलाकों में निगरानी बढ़ा रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी तस्करी की घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला न केवल ड्रग्स की समस्या को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे जेलें अपराधियों के लिए नेटवर्किंग का अड्डा बन रही हैं।
अंततः, पुलिस की यह मुस्तैदी युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की कमर तोड़ने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाली है।
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