जयपुर | राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही कार्यकर्ता राजनीतिक नियुक्तियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अब इस मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने हाल ही में सीकर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नियुक्तियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके इस बयान से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
सामूहिक निर्णय से होंगी नियुक्तियां
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि भाजपा में नियुक्तियों का फैसला कोई एक व्यक्ति नहीं लेता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां फैसले पूरी तरह से सामूहिक होते हैं। मुख्यमंत्री अकेले नियुक्तियां तय नहीं करते, बल्कि उन्हें प्रदेश के सभी प्रमुख नेताओं से संवाद करना होता है। इसके बाद संगठन और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति भी अनिवार्य होती है।
हजारों कार्यकर्ताओं को मिलेगा अवसर
एक मोटे अनुमान के मुताबिक, राजस्थान में लगभग 12 हजार से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को विभिन्न सरकारी पदों पर एडजस्ट किया जा सकता है। प्रदेश में 110 से ज्यादा बोर्ड, निगम, आयोग और यूआइटी (UIT) अध्यक्षों के पद खाली पड़े हैं। इन नियुक्तियों में कई बड़े नेताओं को कैबिनेट या राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाएगा।
प्रमुख रिक्त पद और वर्तमान स्थिति
वर्तमान में राजस्थान स्टेट कृषि विपणन बोर्ड, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राजस्थान खादी ग्रामोद्योग बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थान बिना अध्यक्ष के चल रहे हैं। इसके अलावा, राजस्थान पर्यटन विकास निगम, आवासन मंडल, महिला आयोग और अल्पसंख्यक आयोग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियां होनी अभी बाकी हैं।
अब तक केवल 9 नियुक्तियां
राज्य सरकार ने अब तक केवल 9 बोर्ड और आयोगों में ही नियुक्तियां की हैं। इनमें देवनारायण बोर्ड, किसान आयोग और राज्य वित्त आयोग जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। लोकायुक्त का पद भी लंबे समय से रिक्त चल रहा है। आखिरी बड़ी नियुक्ति राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में अरुण चतुर्वेदी की हुई थी।
कार्यकर्ताओं में बढ़ती उम्मीदें
प्रदेश प्रभारी ने स्वीकार किया कि नियुक्तियों में देरी हुई है, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पार्टी स्थानीय चुनावों और आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रही है।