जयपुर | राजस्थान में आगामी जनगणना 2027 की डिजिटल तैयारियों को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। मंगलवार को जयपुर स्थित हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एचसीएम रीपा) में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ चार दिवसीय 'जनगणना 2027' मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने दीप प्रज्वलित कर सत्र की शुरुआत की। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनगणना केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि इसे एक व्यापक 'जन-आंदोलन' का रूप दिया जाना चाहिए। इसमें हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करना मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी है।
डिजिटल इंडिया का नया अध्याय
मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश के इतिहास में यह पहली बार है जब जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मिनिमम गवर्नमेंट—मैक्जिमम गवर्नेंस' के विजन को धरातल पर उतारने जैसा है। तकनीक के प्रयोग से डेटा के संकलन में पारदर्शिता आएगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल जनगणना के माध्यम से सुशासन की नई परिभाषा लिखी जाएगी। तकनीक नागरिकों और सरकार के बीच की दूरी को कम करने का काम करेगी। इससे प्राप्त आंकड़े भविष्य की लोक कल्याणकारी नीतियों के निर्माण में अत्यंत सटीक और सहायक सिद्ध होंगे। यह नवाचार डेटा विश्लेषण को भी तेज बनाएगा।
प्रशिक्षण का विस्तृत रोडमैप
जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने प्रशिक्षण के व्यापक ढांचे पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस चार दिवसीय गहन प्रशिक्षण शिविर में कुल 103 अधिकारी भाग ले रहे हैं। इनमें राज्य सरकार के 70 और जनगणना निदेशालय के 33 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाएंगे। यह मास्टर ट्रेनर्स आगे चलकर जिला स्तर पर लगभग 2550 फील्ड ट्रेनर्स को तैयार करेंगे। अंततः, यह श्रृंखला राज्य के कोने-कोने में तैनात लगभग 1 लाख 60 हजार प्रगणकों और सुपरवाइजर्स तक पहुंचेगी। प्रगणकों को जमीनी स्तर पर डेटा एकत्र करने के लिए आधुनिक तकनीकों और व्यवहारकुशलता का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महत्वपूर्ण तिथियां और प्रक्रिया
राज्य जनगणना नोडल अधिकारी भवानी सिंह देथा ने कार्यक्रम के दौरान जनगणना के चरणों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण के तहत प्रदेश में 1 मई से 15 मई तक 'स्वगणना' (Self-Enumeration) की प्रक्रिया चलेगी, जिसमें नागरिक स्वयं अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। इसके पश्चात, 16 मई से 14 जून तक घर-घर जाकर मकानों के सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। यह चरण यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि कोई भी परिवार या मकान गणना से छूट न जाए। इस पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित रखने के लिए जिला प्रशासन को भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
तकनीकी टूल्स और डेटा सुरक्षा
इस बार की जनगणना मानकीकरण, डिजिटलीकरण और उत्तरदायित्व के सिद्धांतों पर आधारित है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जनगणना से संबंधित परिभाषाओं और मकान सूचीकरण के जटिल प्रश्नों को सरल तरीके से समझने का अभ्यास कराया जा रहा है। यह सटीक डेटा संग्रह के लिए बेहद जरूरी है। अधिकारियों को एचएलओ (HLO) मोबाइल ऐप और सीएमएमएस (CMMS) पोर्टल के कुशल संचालन की जानकारी दी गई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डेटा की गोपनीयता (Privacy) को लेकर कड़े प्रोटोकॉल बनाए गए हैं। नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्शन और सुरक्षित सर्वर का उपयोग किया जाएगा ताकि सुरक्षा से समझौता न हो।
प्रशिक्षण सत्रों की रूपरेखा
प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ प्रायोगिक (Practical) सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। पहले दिन के विभिन्न सत्रों में प्रशिक्षण ढांचे, प्रशिक्षकों की भूमिका, उनके आवश्यक कौशल और प्रगणकों के साथ संवाद करने की पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह प्रशिक्षकों को आत्मविश्वास प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। चौथे और पांचवें सत्र में आधारभूत अवधारणाओं और प्रगणकों के साथ सहभागिता बढ़ाने के तरीकों को समझाया गया। उद्घाटन के मौके पर एचसीएम रीपा की महानिदेशक श्रीमती श्रेया गुहा और अतिरिक्त महानिदेशक शाहीन अली खान भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की। यह जनगणना राज्य के विकास का नया खाका तैयार करेगी।