जयपुर | राजस्थान को बाल विवाह की कुप्रथा से निजात दिलाने के लिए बाल अधिकारिता विभाग ने व्यापक अभियान छेड़ा है। इसी कड़ी में राज्य रणनीति एवं कार्ययोजना 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
अधिकारियों को मिली कानूनी जानकारी
जयपुर के HCM रीपा में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में जयपुर, सीकर, दौसा, झुंझुनूं और भरतपुर जिलों के नामांकित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों ने भाग लिया।प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के कड़े प्रावधानों और उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समझाया गया।
समाज में जागरूकता जरूरी
विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों ने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर बाल विवाह के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाएं और एक सकारात्मक वातावरण तैयार करें।
बाल विवाह रोकथाम हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार कर वातावरण निर्माण के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। - रमाकान्त, तकनीकी विशेषज्ञ
इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य साल 2026 तक प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाना है। बेहतर रणनीति और कानूनी ज्ञान के साथ अधिकारी अब इस दिशा में और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे।इस पहल से न केवल बाल अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि समाज की मुख्यधारा में बच्चों के विकास को भी नई गति मिलेगी। प्रशासन इस मुद्दे पर अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है।
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