जयपुर | राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने न्याय व्यवस्था में लोक अभियोजकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक राज्य का प्रतिनिधित्व करने के साथ संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करते हैं।
न्याय व्यवस्था की मजबूती पर जोर
जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने लोक अभियोजकों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का संकल्प हर व्यक्ति तक पारदर्शी न्याय पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में संवेदनशील और प्रभावी कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। न्याय की सुलभता ही लोकतंत्र की असली पहचान है।
उन्होंने बताया कि बदलते न्यायिक दृष्टिकोणों के साथ अधिकारियों का निरंतर प्रशिक्षण अनिवार्य है। यह कार्यशाला लोक अभियोजकों को नए कानूनों और साइबर चुनौतियों के प्रति अधिक दक्ष और संवेदनशील बनाएगी।
नए कानूनों से बदली न्याय की परिभाषा
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि तीन नए कानूनों ने भारतीय न्याय प्रणाली को औपनिवेशिक मानसिकता से पूरी तरह मुक्त कर भारतीयता का रंग दिया है।
इन नए कानूनों में अब दंड के स्थान पर न्याय को प्राथमिकता दी गई है। कानून के केंद्र में अब आम नागरिक है, जिसे त्वरित न्याय दिलाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन नए कानूनों के माध्यम से भारतीय न्याय प्रणाली को औपनिवेशिक सोच से मुक्त कर भारतीय बनाने का परिवर्तनकारी कार्य किया है।
डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के माध्यम से न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने पर विशेष बल दिया गया है। इससे अदालती कार्यवाही में पारदर्शिता आएगी और मामलों का निपटारा तेजी से होगा।
42 नए न्यायालयों की स्थापना
प्रदेश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 42 नए न्यायालय स्थापित किए हैं। यह कदम दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित होगा।
फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और ब्यावर जैसे जिलों में जिला एवं सेशन न्यायालय खोले गए हैं। इसके अलावा बाड़मेर, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ और सलूंबर में भी अदालतों का विस्तार किया गया है।
बड़ी सादड़ी और केशोरायपाटन में नियमित अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायालय स्थापित किए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर लंबित मामलों के बोझ को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
भ्रष्टाचार और पॉक्सो मामलों पर प्रहार
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए झुंझुनूं, प्रतापगढ़, टोंक और राजसमंद में विशेष न्यायालय खोले गए हैं। चित्तौड़गढ़, बारां और सीकर में भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोर्ट काम करेंगे।
बच्चों की सुरक्षा के लिए हनुमानगढ़, सवाई माधोपुर, चूरू, बीकानेर और जोधपुर में पॉक्सो एक्ट के तहत विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं। यह कदम समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा देगा।
झुंझुनूं में एनआई एक्ट के तहत विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय खोला गया है। इन विशिष्ट न्यायालयों के माध्यम से विशिष्ट अपराधों पर अंकुश लगाने और न्याय की गति बढ़ाने का लक्ष्य है।
विधिक सहायता और जन-कल्याण
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने अब तक 27 हजार से अधिक लोगों को विधिक सहायता प्रदान की है। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो कानूनी खर्च नहीं उठा सकते।
राजस्थान पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत 4 हजार पीड़ितों को 85 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। सरकार पीड़ितों के पुनर्वास और उनके न्याय के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन भी बड़े स्तर पर किया जा रहा है। अब तक 1 लाख 20 हजार शिविरों के माध्यम से करीब 77 लाख लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुए हैं।
साइबर सुरक्षा और एआई का उपयोग
बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार साइबर सुरक्षा को लेकर सजग है। इसके लिए साइबर सुरक्षा सिमुलेशन लैब की स्थापना की गई है।
ऑपरेशन साइबर शील्ड के माध्यम से अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। 10 हजार से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए 12 लाख लोगों को साइबर ठगी से बचाया गया है।
आने वाले समय में साइबर अपराधों के विश्लेषण के लिए एआई (AI) आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा। राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की स्थापना भी जल्द की जाएगी।
2030 तक हर जिले में साइबर थाना
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2030 तक राजस्थान के समस्त जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित कर दिए जाएंगे। वर्तमान में सभी थानों पर साइबर हेल्प डेस्क कार्यरत हैं।
डिजिटल अरेस्ट जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए हेल्पलाइन कॉल सेंटर की व्यवस्था की जा रही है। तकनीक का उपयोग कर पुलिस और अभियोजन को और अधिक स्मार्ट बनाया जा रहा है।
दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता बरतने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे दिव्यता का प्रतीक हैं। उनके प्रकरणों में अधिक गंभीरता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना लोक अभियोजकों का दायित्व है।
निष्कर्ष: न्याय की नई दिशा
कार्यशाला में विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने भी सरकार के ध्येय को दोहराया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में न्याय की पहुंच अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है।
यह आयोजन लोक अभियोजकों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों के सुझावों से भविष्य की न्यायिक चुनौतियों का समाधान खोजने में प्रदेश को नई दिशा मिलेगी।
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