राजस्थान

माटी कला को मिला सरकार का साथ: राजस्थान: माटी कला और शिल्पकारों के लिए सीएम की बड़ी सौगात

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 03 मई 2026, 11:07 दोपहर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने माटी कला शिल्पकारों के लिए पेंशन और आधुनिक उपकरणों का ऐलान किया।

जयपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के शिल्पकारों और माटी कला से जुड़े परिवारों के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार हर वर्ग के उत्थान के लिए संकल्पित है।

मुख्यमंत्री ने माटी कला को शगुन और प्रगति का प्रतीक माना है। उन्होंने शिल्पकारों के विकास के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है।

शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर एक विशेष अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इसमें कुम्हार, कुमावत और प्रजापत समाज के लोग शामिल हुए।

प्रतिनिधिमंडल ने बजट घोषणाओं और समाज हित में किए गए कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। इस दौरान माहौल काफी उत्साहजनक रहा।

शिल्पकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिल्पकारों की सामाजिक सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए कई योजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 18 विभिन्न ट्रेड के दस्तकारों को लाभ मिल रहा है। इनमें कुम्हार, मूर्तिकार और राजमिस्त्री शामिल हैं।

इन दस्तकारों को मात्र 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उनका व्यवसाय बढ़ेगा और वे आत्मनिर्भर बनेंगे।

वर्ष 2025 तक 2 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 53 हजार से अधिक शिल्पकारों को ऋण मिल चुका है।

मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना

श्रमिकों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना एक बड़ा सहारा बनी है। इसमें लोक कलाकारों को भी जोड़ा गया है।

60 वर्ष की आयु पूरी होने पर पात्र व्यक्तियों को 3 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। यह उनके बुढ़ापे की लाठी साबित होगी।

सरकार का मानना है कि कलाकारों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहिए। पेंशन योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे लाखों परिवारों को लाभ होगा।

शिक्षा और विद्यार्थी कल्याण की पहल

समाज के भविष्य यानी विद्यार्थियों के लिए भी मुख्यमंत्री ने बड़ी घोषणाएं की हैं। छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की राशि बढ़ाई गई है।

अब छात्रवासों में रहने वाले विद्यार्थियों को 3 हजार 250 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। यह राशि उनकी सुविधाओं और बेहतर खान-पान पर खर्च होगी।

एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के बच्चों के लिए प्रमाण पत्र की प्रक्रिया सरल की गई है। अब 8वीं पास करते ही प्रमाण पत्र मिल जाएगा।

जन्म प्रमाण पत्र के साथ ही जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे अभिभावकों की भागदौड़ कम होगी और बच्चों का समय बचेगा।

माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

माटी कला को आधुनिक बनाने के लिए 'माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किया जाएगा। यह नवाचार इस कला को वैश्विक पहचान दिलाएगा।

माटी कला बोर्ड के माध्यम से 1350 कामगारों को निशुल्क इलेक्ट्रिक चाक दिए गए हैं। साथ ही मिट्टी गूंथने की मशीन भी प्रदान की गई है।

डूंगरपुर में एक भव्य शिल्पग्राम बनाने के लिए 9 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे स्थानीय पर्यटन और पारंपरिक कला को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

सृजन और विरासत का संरक्षण

मुख्यमंत्री ने कुमावत समाज की वास्तुकला और शिल्पकला की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने इसे एक अनमोल विरासत और ईश्वर का वरदान करार दिया।

"कुमावत समाज सृजन और कला से जुड़ा है। उन्हें इस विरासत को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी को तकनीकों में दक्ष बनाना चाहिए।"

उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे युवाओं में शिक्षा की अलख जगाएं। प्रतिभाओं को तलाशने और तराशने के लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान दें।

युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण

राज्य सरकार ने साढ़े 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार का मुख्य ध्येय और मिशन है।

मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत दो लाख युवाओं को इंटर्नशिप करवाई जा रही है। इससे उन्हें वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त हो रहा है।

प्रदेश की 144 राजकीय आईटीआई में स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए हैं। आधुनिक शिक्षा और तकनीक से ही राजस्थान का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में जीत हासिल करेगा।

माटी के लाल पुरस्कार और सम्मान

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने ’माटी राजस्थान री’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक राजस्थान की समृद्ध माटी कला के इतिहास को दर्शाती है।

विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कुमावत समाज की विभूतियों को सम्मानित किया गया। उन्हें ’माटी के लाल’ पुरस्कार देकर उनके योगदान को सराहा गया।

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने भी सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन से माटी कला फिर से पल्लवित हो रही है।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

अंत में, मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार हर कदम पर समाज के साथ खड़ी है। इन योजनाओं से शिल्पकारों के जीवन में गुणात्मक सुधार आएगा।

राजस्थान की पारंपरिक कलाएं अब आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ेंगी। इससे न केवल स्वरोजगार बढ़ेगा, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान भी और गहरी होगी।

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