राजस्थान

उदयपुर का मेगा वाटर प्रोजेक्ट: देवास-3 & 4: उदयपुर की प्यास बुझाएगा 1691 करोड़ का प्रोजेक्ट

desk · 22 जून 2026, 12:45 दोपहर
सीएम भजनलाल शर्मा ने 'उड़नखटोले' से लिया जायज़ा। यह प्रोजेक्ट उदयपुर की झीलों को साल भर लबालब रखेगा और 186 गांवों की प्यास बुझाएगा।

उदयपुर | राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को मेवाड़ अंचल के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी पेयजल प्रोजेक्ट का हवाई जायजा लिया। सीएम ने हेलीकॉप्टर से 1,691 करोड़ रुपये की लागत वाली देवास-3 और देवास-4 परियोजना के कार्यों का निरीक्षण किया, जो उदयपुर की भविष्य की प्यास बुझाने के लिए तैयार की जा रही है।

सीएम का 'उड़नखटोला' निरीक्षण और सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हेलीकॉप्टर से उदयपुर संभाग की गोगुंदा तहसील पहुंचे। यहां उन्होंने अरावली की ऊंची पहाड़ियों के बीच बन रहे विशाल बांधों और सुरंग निर्माण के कार्यों को आसमान से देखा।

हवाई सर्वे के दौरान जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ मौजूद थे। अधिकारियों ने सीएम को टनल के अलग-अलग एडिट पॉइंट्स पर चल रहे काम की प्रगति रिपोर्ट दी।

सीएम ने 3.15 किलोमीटर, 5.325 किलोमीटर और 9.10 किलोमीटर पर स्थित तीन मुख्य एडिट्स का बारीकी से निरीक्षण किया, जहां टनल बोरिंग और ब्लास्टिंग का काम तेजी से चल रहा है।

गुणवत्ता और समय-सीमा पर जोर

निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के मुख्य तकनीकी अभियंताओं के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार, जिस कार्य का शिलान्यास हम करते हैं, उसका उद्घाटन भी हमें ही समय पर करना है। इस प्रोजेक्ट को तय समय-सीमा में, बिना किसी तकनीकी लापरवाही के, उच्च गुणवत्ता और पूर्ण सुरक्षा मानकों के साथ पूरा किया जाए।

सीएम ने बांध निर्माण से प्रभावित होने वाले स्थानीय परिवारों के उचित मुआवजे और पुनर्वास के कार्यों को भी पूरी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत निपटाने के निर्देश दिए।

आखिर क्या है देवास-3 और देवास-4 पेयजल परियोजना?

उदयपुर, जिसे 'झीलों की नगरी' भी कहा जाता है, की खूबसूरती का आधार पिछोला और फतेहसागर जैसी ऐतिहासिक झीलें हैं। गर्मियों में इन झीलों का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, जिससे पूरे संभाग में पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है।

इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए साबरमती बेसिन की वाकल नदी के पानी को मोड़कर उदयपुर की झीलों तक लाने की यह विशाल योजना बनाई गई है, जिसे 'देवास परियोजना' नाम दिया गया है।

देवास तृतीय: नाल गांव में विशाल बांध

इस प्रोजेक्ट का तीसरा चरण उदयपुर जिले की गोगुंदा तहसील के नाल (नाथिया थल) गांव के पास वाकल नदी पर बन रहा है। इसका कैचमेंट एरिया 86 वर्ग किलोमीटर है और इसकी कुल जल भराव क्षमता 500 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) है। यहां से पानी आगे भेजने के लिए 10.38 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है।

देवास चतुर्थ: अंबावा में लिंक प्रोजेक्ट

चौथे चरण का बांध भी गोगुंदा तहसील के अंबावा (झांक) गांव के पास बन रहा है। इसका कैचमेंट एरिया 90 वर्ग किलोमीटर और क्षमता 500 MCFT है। यहां से पानी को देवास-3 बांध तक पहुंचाने के लिए 3.88 किलोमीटर लंबी एक लिंक टनल का निर्माण किया जा रहा है।

कैसे काम करेगा यह पूरा सिस्टम?

जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री को नक्शे के माध्यम से समझाया कि यह पूरा प्रोजेक्ट ग्रेविटी और आधुनिक टनल इंजीनियरिंग के सिद्धांत पर काम करेगा। इसमें पानी को पंप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सबसे पहले देवास-4 बांध का पानी 3.88 किमी लंबी टनल से देवास-3 बांध में आएगा। इसके बाद दोनों बांधों का कुल पानी 10.38 किमी लंबी मुख्य सुरंग से देवास-2 के आकोदड़ा बांध तक पहुंचाया जाएगा।

आकोदड़ा बांध से यह पानी बूझड़ा और अमरजोक नदी के रास्ते सीधा उदयपुर की विश्व प्रसिद्ध पिछोला झील में पहुंचेगा।

उदयपुर को मिलेगा 1000 MCFT अतिरिक्त पानी

इस पूरे नेटवर्क के जरिए हर साल कुल 1,000 मिलियन घन फीट (MCFT) अतिरिक्त पानी उदयपुर की झीलों में डायवर्ट किया जा सकेगा। इससे उदयपुर शहर को रोजाना 3.43 करोड़ लीटर अतिरिक्त शुद्ध पेयजल मिलना सुनिश्चित होगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा इस मेगा प्रोजेक्ट का लाभ?

इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूरा होने पर सबसे बड़ा फायदा उदयपुर जिले को मिलेगा। उदयपुर शहर और आसपास के कस्बों की पेयजल समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

इसके अलावा, परियोजना के डाउनस्ट्रीम में आने वाले गोगुंदा और कोटड़ा उपखंड के 186 आदिवासी गांवों को भी पीने के साफ पानी की लाइनों से जोड़ा जाएगा।

झीलों में साल भर पानी रहने से भूजल स्तर में भी सुधार होगा, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ राजसमंद और चित्तौड़गढ़ के सीमावर्ती इलाकों को भी मिलेगा।

यह प्रोजेक्ट न केवल मेवाड़ की प्यास बुझाएगा, बल्कि क्षेत्र के लिए एक नई आर्थिक सुबह भी लेकर आएगा। साल भर लबालब भरी झीलें उदयपुर के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन उद्योग को कई गुना बढ़ा देंगी, जिससे पूरे मेवाड़ संभाग को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

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