बीकानेर | राजस्थान सरकार ने मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपात्मक नियुक्ति देने से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त शासन सचिव डॉ. मुकुट बिहारी जांगिड़ द्वारा जारी अधिसूचना के तहत राजस्थान मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की अनुकंपात्मक नियुक्ति नियम, 1996 में संशोधन किया गया है। इसके साथ ही आश्रित की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
पति-पत्नी से लेकर गोद लिए पुत्र-पुत्री भी शामिल
संशोधित नियमों के अनुसार अब मृत सरकारी कर्मचारी का पति या पत्नी, पुत्र तथा कर्मचारी के जीवनकाल में कानूनी रूप से गोद लिया गया पुत्र अनुकंपा नियुक्ति के लिए आश्रित की श्रेणी में शामिल होगा। इसके अलावा अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा पुत्री तथा कर्मचारी के जीवनकाल में कानूनी रूप से गोद ली गई पुत्री को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
अन्य आश्रित नहीं होने पर बहू और विवाहित पुत्री भी पात्र
सरकार ने प्रावधान किया है कि यदि उपरोक्त श्रेणियों में कोई अन्य आश्रित उपलब्ध नहीं है, तो बहू को भी आश्रित माना जाएगा। ऐसी स्थिति में विवाहित पुत्री को भी आश्रित की श्रेणी में शामिल किया जा सकेगा।
अविवाहित कर्मचारी के मामले में माता-पिता और भाई-बहन शामिल
अविवाहित सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के मामले में उसके ऊपर आश्रित माता-पिता को भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए आश्रित माना जाएगा। इसके साथ ही आश्रित अविवाहित भाई या अविवाहित बहन को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
मृत्यु के समय आश्रित होना जरूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए संबंधित व्यक्ति का मृत सरकारी कर्मचारी पर उसकी मृत्यु के समय आश्रित होना आवश्यक होगा। यानी केवल निर्धारित रिश्ते में होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कर्मचारी की मृत्यु के समय उस पर वास्तविक रूप से आश्रित होना भी जरूरी होगा।
तत्काल प्रभाव से लागू होंगे संशोधित नियम
कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में राजस्थान के राज्यपाल की शक्तियों के तहत इन संशोधनों को लागू किया गया है। संशोधित प्रावधान तत्काल प्रभाव से प्रभावी होंगे। इससे मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रित परिवारजनों के लिए अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में आने वाली श्रेणियां पहले की तुलना में व्यापक हो गई हैं।