जयपुर | राजस्थान के सहकारिता विभाग में कार्य संस्कृति को बदलने और दफ्तरों को चकाचक करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने सोमवार को ‘स्वच्छ सहकार, समृद्ध सहकार’ विशेष अभियान का विधिवत शुभारम्भ किया।
यह विशेष अभियान प्रदेश भर के सहकारिता कार्यालयों में 4 मई से 29 मई 2026 तक चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दफ्तरों को स्वच्छ, व्यवस्थित और प्रशासनिक रूप से दक्ष बनाना है।
डॉ. समित शर्मा ने अभियान के पहले ही दिन नेहरू सहकार भवन का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद विभिन्न अनुभागों और सहकारी संस्थाओं के कामकाज का बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यस्थल की स्वच्छता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंदगी से राजकार्य पर बुरा असर पड़ता है।
कार्यस्थल पर सकारात्मकता और प्रशासनिक सुधार
शासन सचिव ने जोर देकर कहा कि यदि कार्यालय साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहेगा, तो कर्मचारियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। इससे सरकारी फाइलों के निपटारे में भी काफी तेजी आएगी।
डॉ. शर्मा के अनुसार, अव्यवस्थित रिकॉर्ड न केवल समय बर्बाद करते हैं, बल्कि जनता के बीच विभाग की नकारात्मक छवि भी बनाते हैं। इसलिए रिकॉर्ड मैनेजमेंट को दुरुस्त करना अब अनिवार्य है।
इस अभियान के जरिए विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। एक स्वच्छ वातावरण मानसिक तनाव को कम करने और बीमारियों के खतरे को घटाने में मददगार होता है।
रिकॉर्ड प्रबंधन और कबाड़ का होगा निस्तारण
अभियान के दौरान सालों से जमा पुराने और अनुपयोगी रिकॉर्ड की पहचान की जाएगी। कबाड़ हो चुकी सामग्री और टूटी कुर्सियों की मरम्मत या उनके निस्तारण की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई है।
डॉ. शर्मा ने फाइलों को स्कैन कर उन्हें ई-फाइल में तब्दील करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इससे भविष्य में कागजी कार्यवाही कम होगी और सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे।
दफ्तरों की दीवारों पर लगे पुराने पोस्टर हटाने और रंग-रोगन करने के आदेश दिए गए हैं। शौचालय और सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई अब विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल होगी।
तीन चरणों में पूरा होगा सफाई का मिशन
‘स्वच्छ सहकार, समृद्ध सहकार’ अभियान को तीन महत्वपूर्ण चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में विभाग के भीतर मौजूद अनुपयोगी रिकॉर्ड और रद्दी सामग्री की पहचान का कार्य किया जाएगा।
दूसरे चरण के अंतर्गत कार्यालयों की व्यापक स्तर पर सफाई और व्यवस्था सुधार का कार्य होगा। इसमें हर अलमारी और डेस्क को व्यवस्थित कर कार्यस्थल को नया रूप दिया जाएगा।
तीसरे और अंतिम चरण में चिह्नित अनुपयोगी सामग्री का नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। सभी कार्यालयों को अपनी प्रगति की "बिफोर और आफ्टर" तस्वीरें शासन सचिव के साथ साझा करनी होंगी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यह केवल एक सफाई अभियान नहीं है, बल्कि एक बेहतर कार्य संस्कृति स्थापित करने की पहल है। इससे विभाग की छवि जनता के बीच अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
कार्यालयों में रिकॉर्ड के अव्यवस्थित प्रबंधन और अस्वच्छता से राजकार्य प्रभावित होता है। स्वच्छ वातावरण से कार्यों के निष्पादन में तेजी आएगी और जनता को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
5S पद्धति: आधुनिक कार्य संस्कृति का नया मंत्र
सहकारिता विभाग अब जापानी '5S' पद्धति को अपनी कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा बना रहा है। इसमें 'सेइरी' (Seiri) यानी छंटनी पहला कदम है, जिसमें अनुपयोगी सामान को अलग किया जाता है।
दूसरा चरण 'सेइतोन' (Seiton) यानी सुव्यवस्था है। इसके तहत फाइलों और उपकरणों को उनके निर्धारित स्थान पर लेबल लगाकर रखा जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर वे तत्काल उपलब्ध हो सकें।
तीसरा चरण 'सेइसो' (Seiso) पूर्ण स्वच्छता पर केंद्रित है। इसमें दफ्तर के हर हिस्से, स्टोर और गलियारों को सुरक्षित और आकर्षक बनाने के लिए नियमित सफाई की व्यवस्था की जाएगी।
चौथा चरण 'सेइकेत्सु' (Seiketsu) मानकीकरण है। इसमें सफाई और फाइल प्रबंधन के लिए एक समान मानक तय किए जाएंगे, जिनका पालन हर कर्मचारी को अपनी दैनिक ड्यूटी के दौरान करना होगा।
अंतिम चरण 'शित्सुके' (Shitsuke) अनुशासन का है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के स्वभाव में स्वच्छता को शामिल करना है ताकि यह अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहकर जीवन का हिस्सा बने।
अनुशासनहीनता पर सख्त रुख और बायोमीट्रिक हाजिरी
निरीक्षण के दौरान डॉ. समित शर्मा ने कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी को निर्धारित समय पर दफ्तर पहुंचने के कड़े निर्देश दिए हैं।
अब विभाग के सभी कार्मिकों के लिए बायोमीट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इसके अलावा, ड्यूटी के दौरान सभी कर्मचारियों को अपना पहचान पत्र (ID Card) प्रदर्शित करना होगा। शासन सचिव ने स्पष्ट किया कि अनुशासन ही किसी भी संस्थान की सफलता की पहली सीढ़ी है।
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है। सभी कार्यालयाध्यक्षों को नियमित मॉनिटरिंग करने और फीडबैक देने की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अभियान के समापन के बाद भी कार्यालयों की स्थिति की औचक समीक्षा की जाएगी। जो कार्यालय बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें भविष्य में विभाग की ओर से प्रोत्साहित और पुरस्कृत भी किया जाएगा।
यह पहल न केवल सहकारिता विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाएगी, बल्कि अन्य विभागों के लिए भी एक मिसाल बनेगी। स्वच्छता अब केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी बन चुकी है।
इस अभियान से आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। जब फाइलें व्यवस्थित होंगी, तो जनता के काम बिना किसी देरी के समय पर पूरे हो सकेंगे।
निष्कर्षतः, ‘स्वच्छ सहकार, समृद्ध सहकार’ अभियान राजस्थान के प्रशासनिक ढांचे में एक सकारात्मक और बड़ा बदलाव लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाला है।
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