जयपुर | राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जयपुर के शासन सचिवालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक कार्यकर्ता पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं होंगी, तब तक केंद्रों का संचालन कुशलतापूर्वक नहीं किया जा सकता। बैठक में शासन सचिव श्रीमती पूनम और निदेशक वासुदेव मालावत भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बेहतर ट्रेनिंग से बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत होगी और उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा मिल सकेगी।
प्रशिक्षण से बदलेगी केंद्रों की तस्वीर
उपमुख्यमंत्री ने जोर दिया कि एक दक्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ता न केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकती है, बल्कि वह गर्भवती महिलाओं और किशोरियों की भी बेहतर देखभाल कर सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्रों पर आने वाली धात्री माताओं को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तभी संभव है, जब वहां का स्टाफ पूरी तरह से अपडेटेड और कुशल हो।
बजट घोषणाओं की समयबद्धता
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी 11 बजट घोषणाएं की गई हैं। दिया कुमारी ने इन सभी घोषणाओं की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन घोषणाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारा जाए। अब तक एक घोषणा पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी 10 को समय पर पूरा करने का लक्ष्य है।
सरकारी स्कूलों में शिफ्ट होंगे केंद्र
एक महत्वपूर्ण फैसले में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में जो आंगनबाड़ी केंद्र किराये के कमरों में चल रहे हैं, उन्हें पास के सरकारी स्कूल भवनों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि बच्चों को स्कूल जैसा माहौल भी मिल सकेगा। उन्होंने शिक्षा विभाग के साथ समन्वय कर 'शाला पूर्व शिक्षा' गतिविधियों को तेज करने के निर्देश दिए।
बुनियादी सुविधाओं पर जोर
दिया कुमारी ने साफ किया कि किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र पर बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इसके लिए अन्य विभागों से मदद लेने को कहा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना और केंद्रों को 'नंदघर' के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उनका लक्ष्य हर केंद्र को एक आदर्श केंद्र बनाना है ताकि ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य और शिक्षा का स्तर सुधरे।