बीकानेर | राजस्थान का सबसे बड़ा सरकारी विभाग, शिक्षा विभाग, कर्मचारियों और अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब राज्य सरकार स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए बीकानेर आ रही है, जो कि विभाग का मुख्यालय है।
शालादर्पण पोर्टल पर 1 अगस्त 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विभाग में लगभग हर तीसरा पद खाली पड़ा है।
विभाग में पदों की चौंकाने वाली स्थिति
पोर्टल के अनुसार, शिक्षा विभाग में कुल 4,13,951 स्वीकृत पद हैं। इन पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 2,92,558 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
इसका सीधा मतलब है कि विभाग में कुल 1,21,640 पद रिक्त हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वरिष्ठ अध्यापक संवर्ग में सबसे ज्यादा कमी
रिक्तियों की सबसे गंभीर स्थिति वरिष्ठ अध्यापक संवर्ग में देखने को मिलती है। इस संवर्ग के लिए कुल 1,10,447 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 58,570 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं।
इस प्रकार, वरिष्ठ अध्यापकों के 51,877 पद खाली पड़े हैं, जो शिक्षण कार्य को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
अन्य महत्वपूर्ण रिक्तियां
विभाग में अन्य कई महत्वपूर्ण पद भी बड़ी संख्या में खाली हैं। इनमें प्राध्यापक (स्कूल शिक्षा) के 15,227, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 24,384 और कनिष्ठ सहायक के 6,355 पद शामिल हैं।
इसके अलावा, बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक के 3,704, उप प्राचार्य के 1,328 और प्राचार्य के 2,753 पद भी रिक्त हैं।
माध्यमिक शिक्षा और प्रशासनिक ढांचा भी प्रभावित
माध्यमिक शिक्षा में भी अध्यापक लेवल-1 के 1,391, लेवल-2 के 1,061, शारीरिक शिक्षा अध्यापक के 1,703 और प्रयोगशाला सहायक के 1,435 पद खाली हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था भी इस कमी से अछूती नहीं है। वरिष्ठ सहायक के 1,698, सहायक प्रशासनिक अधिकारी के 978, और प्रशासनिक अधिकारी के 79 पद रिक्त हैं। यहां तक कि संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक और जिला शिक्षा अधिकारी जैसे उच्च अधिकारियों के पद भी खाली हैं।
एक संवर्ग में अधिशेष कर्मचारी
हालांकि, इस बीच एक दिलचस्प आंकड़ा भी सामने आया है। पूर्व प्राथमिक शिक्षा अध्यापक संवर्ग में स्वीकृत 1,665 पदों के मुकाबले 1,912 कर्मचारी कार्यरत हैं, यानी 247 कर्मचारी अधिशेष हैं।
*Edit with Google AI Studio