बालोतरा | राजस्थान के शिक्षा विभाग में इन दिनों नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। लेकिन इस बीच एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है जिससे हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। विभाग ने कक्षा 9वीं और 11वीं की पूरक परीक्षा का कार्यक्रम अब तक घोषित नहीं किया है। जबकि नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 आगामी 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। इस देरी की वजह से शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक सभी गहरे असमंजस की स्थिति में हैं।
परीक्षा परिणामों के बाद बढ़ी मुश्किलें
प्रदेश में वार्षिक परीक्षाओं की तिथियों में बदलाव के बाद 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं 7 से 19 मार्च तक हुई थीं। इन परीक्षाओं के परिणाम विभाग द्वारा 25 मार्च को घोषित कर दिए गए थे। परिणाम आने के बाद जो छात्र किसी विषय में अनुत्तीर्ण रहे हैं, वे अब पूरक परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही वे छात्र भी परेशान हैं जो मेडिकल कारणों से मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे। विभागीय स्पष्टता के अभाव में इन विद्यार्थियों की अगली कक्षा में प्रोन्नति पर संकट मंडरा रहा है।
अगले सत्र की पढ़ाई पर पड़ेगा बुरा प्रभाव
बालोतरा के एक स्कूल के संस्था प्रधान ने बताया कि उनके यहां कई छात्र पूरक परीक्षा के पात्र हैं। विभागीय निर्देशों के अभाव में स्कूल प्रबंधन इन छात्रों के लिए कोई तैयारी नहीं कर पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1 अप्रैल से सत्र शुरू करने की जल्दबाजी में विभाग ने पूरक परीक्षा को भुला दिया। सामान्यतः परिणाम के तुरंत बाद पूरक परीक्षा की तिथियां जारी कर दी जाती हैं। ताकि छात्र समय रहते अपने बैक पेपर क्लियर कर सकें और नए सत्र की पढ़ाई शुरू कर सकें।
शिक्षा विभाग का प्रवेशोत्सव अभियान
एक तरफ जहां परीक्षाओं को लेकर लापरवाही दिख रही है, वहीं नामांकन बढ़ाने पर पूरा जोर है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रवेशोत्सव अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत अध्यापकों द्वारा हाउस होल्ड सर्वे का कार्य 27 मार्च से ही प्रारंभ किया जा चुका है। यह अभियान चार विशेष चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। इसके मुख्य चरण 27 मार्च, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल और 15 अप्रैल को आयोजित किए जाएंगे।
प्रवेशोत्सव के लक्ष्य और रणनीतियां
इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों को शत-प्रतिशत नामांकन से जोड़ना है। विभाग चाहता है कि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्य धारा से बाहर न रहे। इसके लिए शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करने और अभिभावकों को प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, पूरक परीक्षा में अटके छात्र इस अभियान के उत्साह के बीच खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
गर्मियों की छुट्टियों का शेड्यूल जारी
नए सत्र के साथ ही विभाग ने ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा भी पहले ही कर दी है। स्कूलों में 1 अप्रैल से 15 मई तक नियमित रूप से पढ़ाई का कार्य चलेगा। इसके बाद 16 मई से 20 जून तक प्रदेश के सभी स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। छुट्टियों के बाद 21 जून से दोबारा स्कूलों का संचालन और शैक्षणिक कार्य शुरू होगा।
अधिकारियों का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर बालोतरा के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवाराम प्रजापत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि पूरक परीक्षा के कार्यक्रम का इंतजार किया जा रहा है। प्रजापत के अनुसार, शिक्षा निदेशालय से निर्देश मिलते ही तुरंत कार्यक्रम जारी किया जाएगा। विभाग का दावा है कि वे छात्रों के हित में जल्द से जल्द फैसला लेने की कोशिश कर रहे हैं।
छात्रों और अभिभावकों की मांग
अभिभावकों का कहना है कि यदि 1 अप्रैल से पहले परीक्षा नहीं हुई तो बच्चों का साल खराब हो सकता है। नए सत्र की किताबें और कक्षाएं शुरू होने के बाद पूरक परीक्षा कराना तार्किक नहीं होगा। छात्रों ने मांग की है कि विभाग को तुरंत प्रभाव से परीक्षा तिथियां घोषित करनी चाहिए। ताकि छात्र अपनी तैयारी पूरी कर सकें और मानसिक तनाव से मुक्त हो सकें।
निष्कर्ष और आगे की राह
राजस्थान शिक्षा विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एक तरफ डिजिटल इंडिया और स्मार्ट एजुकेशन की बातें हो रही हैं, दूसरी तरफ बुनियादी प्रबंधन में चूक हो रही है। पूरक परीक्षा का समय पर न होना प्रशासनिक सुस्ती का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। अब देखना यह होगा कि निदेशालय इस पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है।