जयपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक नई राह दिखाई है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा बचाना ही असल में ऊर्जा बनाना है।
ऊर्जा बचत: आत्मनिर्भरता की पहली सीढ़ी
जयपुर में आयोजित राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की ऊर्जा नीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रदेश के विकास के लिए हरित ऊर्जा को अनिवार्य बताया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संसाधनों का सही और संयमित उपयोग ही हमें भविष्य की चुनौतियों से बचा सकता है। ऊर्जा की बचत सबसे सस्ता और प्रभावी विकल्प है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान न केवल अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि दूसरे राज्यों को भी ऊर्जा प्रदान करेगा। प्रदेश अब हरित क्रांति का केंद्र बन रहा है।
राजस्थान में गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के विकास की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार इन संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रही है।
इलेक्ट्रिक वाहन से दिया बड़ा संदेश
इस खास कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा मुख्यमंत्री के पहुंचने के अंदाज को लेकर रही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चलाकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।
उनका यह कदम पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने का एक सशक्त संदेश था। उन्होंने दिखाया कि बदलाव की शुरुआत खुद से करनी होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। स्वच्छ ऊर्जा को अपनाकर ही हम पर्यावरण को बचा सकते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से न केवल कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, बल्कि इससे हमारी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह एक बड़ा जनआंदोलन है।
निवेशकों के लिए 'पधारो म्हारे देश'
मुख्यमंत्री ने देश-विदेश के निवेशकों को राजस्थान आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान निवेश के लिए देश के सबसे अनुकूल राज्यों में से एक है।
उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को पूरा करने में राजस्थान की मदद करें और अपना योगदान दें।
सरकार उद्योगों को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। प्रदेश में निवेश के लिए एक बेहतर और पारदर्शी वातावरण तैयार किया गया है ताकि काम आसान हो।
राजस्थान में सौर, पवन और बायो ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के कई बड़े प्रस्ताव मिले हैं। यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक नए युग की शुरुआत है।
"ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन का सबसे सस्ता, प्रभावी और स्थायी विकल्प है। हमारी सरकार राजस्थान को देश का पावरहाउस बनाने के लिए संकल्पित है।"
अक्षय ऊर्जा में राजस्थान के नए प्रतिमान
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। राजस्थान इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है।
प्रदेश में 828 गीगावाट सौर ऊर्जा और 284 गीगावाट पवन ऊर्जा की अपार क्षमता है। सरकार इस प्राकृतिक उपहार का पूरा लाभ उठाने की योजना बना रही है।
अब तक राज्य में 47 गीगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है। सौर परियोजनाओं के मामले में राजस्थान आज पूरे देश में नंबर एक पर है।
मौजूदा सरकार के छोटे से कार्यकाल में ही 24 हजार मेगावाट से अधिक की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई है। यह रफ्तार राज्य की प्रगति को दर्शाती है।
ग्रीन एनर्जी और ई-मोबिलिटी पर जोर
किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'कुसुम योजना' के तहत कृषि भूमि पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जा रहे हैं। इससे किसानों को दिन में बिजली मिल सकेगी।
योजना के तहत अब तक 4 हजार मेगावाट की परियोजनाएं लग चुकी हैं। इसके अलावा 6500 मेगावाट की नई परियोजनाओं का आवंटन भी कर दिया गया है।
सरकारी भवनों को भी अब सौर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है। अब तक 1000 से अधिक सरकारी इमारतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जो सराहनीय है।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत प्रदेश में 250 स्थानों पर इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करना अब और भी आसान हो जाएगा।
ऊर्जा भंडारण और भविष्य का लक्ष्य
भविष्य की बिजली मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) पर ध्यान दिया है। इसके लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
वर्ष 2030 तक 10 गीगावाट और 2047 तक 290 गीगावाट भंडारण क्षमता का लक्ष्य है। बैटरी स्टोरेज के लिए 6 हजार मेगावाट का आवंटन पहले ही हो चुका है।
ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने भी नागरिकों से ऊर्जा बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा का विस्तार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस कॉन्क्लेव में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और कई बड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी ने राजस्थान के ऊर्जा मॉडल की जमकर सराहना की और सुझाव दिए।
राजस्थान की यह हरित ऊर्जा क्रांति आने वाले समय में प्रदेश की तस्वीर बदल देगी। मुख्यमंत्री के इन प्रयासों से राज्य जल्द ही ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।
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