जयपुर | राजस्थान के जयपुर में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए एक क्रांतिकारी पहल की शुरुआत हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शिशुओं के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया है।
इस मॉड्यूल को अब राजस्थान से मिले फीडबैक के आधार पर पूरे देश में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य नवजात शिशुओं को दी जाने वाली ऑक्सीजन थेरेपी को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है।
जयपुर में दो दिवसीय पायलट ट्रेनिंग
जयपुर के जे के लोन अस्पताल में 4 और 5 मई को दो दिवसीय राज्य स्तरीय राष्ट्रीय पायलट प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश भर के बाल रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम में ऑक्सीजन के सही और सुरक्षित उपयोग पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने सी-पेप (CPAP) तकनीक को जीवन रक्षक के रूप में अपनाने पर चर्चा की।
मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम का विजन
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि इस प्रशिक्षण का लक्ष्य स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाना है। वे अब साक्ष्य-आधारित ऑक्सीजन थेरेपी का उपयोग अधिक कुशलता से कर सकेंगे।
इस हाइब्रिड लर्निंग प्रोग्राम में ऑक्सीजन डिलीवरी सिस्टम और पल्स ऑक्सीमेट्री द्वारा मॉनिटरिंग के प्रोटोकॉल सिखाए गए। राजस्थान के फीडबैक को राष्ट्रीय गाइडलाइंस में शामिल करने की योजना है।
डॉ. जोगाराम ने कहा, "इन प्रतिभागियों को संस्थागत स्तर पर नवजात देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु नामांकित किया गया है। वे भविष्य में अन्य कर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे।"
राजस्थान के SNCU में आधुनिक सुविधाएं
शिशु स्वास्थ्य परियोजना निदेशक डॉ. प्रदीप चौधरी के अनुसार, राज्य के 71 'स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट' (SNCU) में प्रभावी ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध है। यह प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
वर्तमान में इन यूनिट्स में लगभग 40 प्रतिशत नवजातों को वेंटिलेटर और सीपीएपी मशीन के जरिए ऑक्सीजन दी जा रही है। इससे शिशु मृत्यु दर को कम करने में काफी मदद मिल रही है।
विशेषज्ञों की टीम और तकनीकी सत्र
इस प्रशिक्षण में डॉ. अनु सचदेवा, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. संदीप कदम और डॉ. तेजो प्रताप जैसे विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने नवजात देखभाल की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किए।
डॉ. अबिरामलथा, डॉ. रमेश चौधरी और डॉ. गुंजन ने भी अपने अनुभव साझा किए। जे.के. मित्तल और एसएनआरसी टीम ने प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल की बारीकियां सिखाईं।
राजस्थान का यह फीडबैक मॉडल देशभर के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार लाएगा। सुरक्षित ऑक्सीजन थेरेपी से न केवल शिशुओं की जान बचेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार आएगा।
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