राजस्थान

अलवर की अनोखी 'पार्क लाइब्रेरी': IAS आर्तिका शुक्ला का बड़ा नवाचार: अलवर में खुली प्रदेश की पहली 'पार्क लाइब्रेरी' विद्या कुंज, मुख्य सचिव ने की जमकर सराहना

मानवेन्द्र जैतावत · 12 अप्रैल 2026, 03:51 दोपहर
अलवर जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला की पहल पर राजस्थान की पहली 'पार्क लाइब्रेरी' शुरू हुई है। 'विद्या कुंज' नामक इस पुस्तकालय में प्रकृति के बीच बैठकर पढ़ने की आधुनिक सुविधा दी गई है, जिसकी प्रशंसा मुख्य सचिव ने भी की है।

अलवर | राजस्थान के सिंहद्वार अलवर से ज्ञान और हरियाली के संगम की एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसकी गूँज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। डिजिटल युग में किताबों से दूरी कम करने के उद्देश्य से अलवर जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल की है।

जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला के विजन को 'विद्या कुंज' का नाम दिया गया है। यह प्रदेश की पहली 'पार्क लाइब्रेरी' है, जो अब राजस्थान में लाइब्रेरी मूवमेंट को एक नई मजबूती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बुद्ध विहार के डी-ब्लॉक में 'विद्या कुंज' का उदय

नगर विकास न्यास (UIT) के सहयोग से शहर की बुद्ध विहार कॉलोनी के डी-ब्लॉक स्थित पार्क में इस लाइब्रेरी को विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका शांत और प्राकृतिक वातावरण है।

इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि पाठक प्रकृति की हरियाली और खुले वातावरण के बीच एकाग्र होकर अध्ययन कर सकें। यह मॉडल पारंपरिक बंद कमरों वाली लाइब्रेरी की अवधारणा से बिल्कुल अलग और आधुनिक है।

लाइब्रेरी की मुख्य विशेषताएं और बनावट

लाइब्रेरी का मुख्य आकर्षण यहाँ बना अत्याधुनिक कांच का हॉल है। यहाँ बैठकर पढ़ना एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है, क्योंकि पाठक पढ़ते समय बाहर की हरियाली का आनंद ले सकते हैं।

इस लाइब्रेरी में 5 हजार से अधिक पुस्तकें रखने की विशाल क्षमता है। वर्तमान में यहाँ साहित्य, प्रतियोगी परीक्षा, सामान्य ज्ञान, धार्मिक और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की लगभग 1500 पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं।

शिक्षा और पर्यावरण का अद्भुत संगम

अक्सर देखा जाता है कि बंद कमरों की लाइब्रेरी में बैठने से पाठक जल्दी ऊब जाते हैं। लेकिन 'पार्क लाइब्रेरी' का कॉन्सेप्ट इस सोच को पूरी तरह बदल रहा है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है।

यहाँ की ताजी हवा और चिड़ियों की चहचहाहट के बीच पढ़ाई का माहौल न केवल तनाव कम करता है, बल्कि एकाग्रता भी बढ़ाता है। यह मॉडल अब राजस्थान के अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

कलक्टर की अपील: अपनी पुरानी यादों को करें दान

जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने इस पहल को जन-सहभागिता (Public Participation) से जोड़ने के लिए एक विशेष अपील की है। उन्होंने जिले के नागरिकों, भामाशाहों और संस्थाओं से पुस्तकें दान करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान, संस्कृति और संस्कार का भंडार होती हैं। उन्होंने आह्वान किया है कि वे अपने घरों में रखी उपयोगी पुस्तकों को इस लाइब्रेरी के लिए दान करें ताकि दूसरों का भविष्य संवर सके।

कैसे और कब करें पुस्तकों का दान?

प्रशासन ने पुस्तक डोनेट करने के लिए आगामी 15 दिनों का विशेष समय निर्धारित किया है। कोई भी नागरिक बुद्ध विहार स्थित पार्क लाइब्रेरी में आकर अपनी पुस्तकें भेंट कर सकता है, जो यहाँ आने वाले छात्रों के काम आएंगी।

यह पहल न केवल ज्ञान के प्रसार में सहायक होगी, बल्कि सामुदायिक जुड़ाव को भी बढ़ावा देगी। लोग अपनी प्रिय पुस्तकों को एक सुरक्षित और उपयोगी स्थान पर साझा कर सकेंगे।

मुख्य सचिव ने बताया 'अनुकरणीय पहल'

अलवर जिला प्रशासन के इस नवाचार की सराहना प्रदेश स्तर पर शुरू हो गई है। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इस पहल को 'लाउडेबल' यानी अत्यंत प्रशंसनीय बताते हुए डॉ. आर्तिका शुक्ला को बधाई दी है।

सीएस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "विद्या कुंज" राजस्थान में पुस्तकालय आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में एक शानदार कदम है। उन्होंने अन्य जिलों को भी ऐसे प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया है।

कौन हैं IAS डॉ. आर्तिका शुक्ला?

डॉ. आर्तिका शुक्ला राजस्थान कैडर की एक प्रतिष्ठित IAS अधिकारी हैं, जो वर्तमान में अलवर जिला कलक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वे अपनी कार्यशैली और शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए देश भर में जानी जाती हैं।

डॉ. आर्तिका शुक्ला ने साल 2015 की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में देश भर में चौथी रैंक (AIR 4) हासिल की थी। सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में यह सफलता पाई थी।

प्रशासनिक सेवा में आने से पहले वे एक डॉक्टर थीं। उन्होंने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), दिल्ली से MBBS की डिग्री हासिल की है। वे मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं।

उनके पिता डॉ. बृजेश शुक्ला एक रेडियोलॉजिस्ट हैं। उनके दो बड़े भाई भी प्रशासनिक सेवाओं में हैं। डॉ. आर्तिका ने साल 2015 बैच के ही IAS अधिकारी जसमीत सिंह संधू से शादी की है।

भविष्य की राह और सामाजिक प्रभाव

'विद्या कुंज' जैसी पहल यह दर्शाती है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। यह लाइब्रेरी छात्रों के लिए एक वरदान साबित होने वाली है।

विशेष रूप से उन छात्रों के लिए जिनके पास घर पर पढ़ाई का शांत माहौल नहीं है। पार्क लाइब्रेरी उन्हें एक ऐसा स्थान देती है जहाँ वे बिना किसी शुल्क के प्रकृति की गोद में बैठकर अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

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