जालौर |
राजस्थान में गोवंश संरक्षण के लिए दिए जाने वाले सरकारी अनुदान में एक बड़े घोटाले की आशंका सामने आई है। महालेखाकार (लेखा परीक्षा दल) की ऑडिट रिपोर्ट ने प्रदेश की कई गोशालाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 38 गोशालाओं ने कथित तौर पर मृत, अनुपस्थित या रिकॉर्ड में सत्यापित नहीं होने वाले गोवंश के नाम पर भी सरकारी अनुदान प्राप्त किया है।
ऑडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
जांच के दौरान लगभग 1.31 लाख गोवंश की संख्या में भारी विसंगति पाई गई। इस गड़बड़ी के आधार पर रिपोर्ट में ₹57.36 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होने का चौंकाने वाला उल्लेख किया गया है।
यह मामला सामने आने के बाद गोशालाओं को मिलने वाले अनुदान की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
जालौर की 7 गोशालाएं भी जांच के घेरे में
इस सूची में जालौर जिले की सात गोशालाओं के नाम भी शामिल हैं, जिन पर कुल ₹16.15 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान का आरोप है। इनमें श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला, पथमेड़ा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, अकेले पथमेड़ा गौशाला को करीब ₹10.95 करोड़ का अतिरिक्त अनुदान जारी होने की बात कही गई है। इसके अलावा, श्री खेतेश्वर गोशाला, खिरोड़ी सहित जिले की अन्य गोशालाओं के नाम भी जांच रिपोर्ट में दर्ज हैं।
कैसे हुआ यह कथित घोटाला?
रिपोर्ट में बताया गया है कि कई मामलों में गोवंश का विवरण 'भारत पशुधन एप' और टैग रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता था।
कई पशुओं के टैग पंजीकृत नहीं थे, तो कुछ टैग निष्क्रिय पाए गए। इसके अलावा, कई मृत पशुओं की जानकारी भी समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई थी।
इन सभी अनियमितताओं के बावजूद, बड़े गोवंश पर प्रतिदिन ₹40 और छोटे गोवंश पर ₹20 की दर से अनुदान का भुगतान लगातार जारी रहा।
विभाग ने जारी किए रिकवरी नोटिस
ऑडिट रिपोर्ट के खुलासे के बाद गोपालन निदेशालय हरकत में आ गया है। विभाग ने 29 मई 2026 को सभी 38 गोशालाओं को नोटिस जारी कर अतिरिक्त राशि वापस जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं कराई गई, तो संबंधित संस्थाओं की आगामी वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, इस मामले पर संबंधित गोशालाओं या उनके संचालकों की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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